राष्ट्रसेवा -जीवसेवा और जीवदया के सच्चे प्रहरी हार्दिक हुंडीया द्वारा राष्ट्रीय पक्षी मोर को पिंजरे से मुक्त करवाया

ऑल इंडिया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन(आईजा )के राष्ट्रीय स्थापक अध्यक्ष हार्दिक जी हुंडीया द्रारा पर्युषण महापर्व के दौरान राष्ट्रसेवा और जीवसेवा का एक उतम उदाहरण समाज को देते हुए राष्ट्रीय पक्षी मोर और द्रुलभ प्रजाति के सर्प को पिंजरे मुक्ति देने का भगीरथ कार्य कीया है।
गुजरात के नवसारी के करीब खडसुपा के पास स्थित नेशनल हाईवे के पास भगवान महावीर स्वामी पांजरापोल मे घायल अवस्था मे एक मोर मिला तब इस पांजरापोल के डो.दवे साहेब की निगरानी मे इस मोर को योग्य सारवार देकर उसे एक बडे पिंजरे मे रखा गया ताकी वो पुरीतरह स्वस्थ हो जाये।
अब यह मोर जब पुरी तरह स्वस्थ हो गया तो उसे पिंजरे से मुक्त करवाने के लिए डो.दवे साहेब ने आईजा के राष्ट्रीय महामंत्री महावीर श्रीश्रीमाल से कहा। महावीर जी ने यह सारी बात विस्तार पूर्वक राष्ट्रीय अध्यक्ष हार्दिक भाइ हुंडीया को बताई तब हार्दिक भाइ मुंबई से नवसारी के खडसुपा गांव स्थित पांजरापोल की मुलाकात लेने पहुंच गये। भगवान महावीर स्वामी जी के पथ को अनुसरने वाले और अबोल जीवो के प्रति अनुकंपा रखने वाले हार्दिक भाई हुंडीया ने पांजरापोल मे गौमाता को हरी घास का चारा और गुड खिलाया।
इस पांजरापोल मे डो.दवे के कहने अनुसार कुछ दिन पूर्व द्रुलभ जाती का सर्प मिला जिसकी अंदाजीत कींमत 350,000 तक हो शकती है इस सर्प का तांत्रिक विघी उपयोग कीया जाता है परंतु कुछ जीवदया प्रेमी ओ ने इसे सपेरो बचाकर इस पांजरापोल मे रखा । डो. दवे हार्दिक भाइ को एक लकडे के बोक्ष के पास लेकर गये जिसको पथ्थरो से ढंक दिया गया था।उस पथ्थरो को हटाते से ही अंदर से एक सर्प निकला।डो.दवे ने हार्दिक भाइ को आग्रह कीया की इस नागदेवता को पांजरापोल मे प्रस्थापित भगवान महावीर स्वामीजी की मूर्ति पर रख दीजिए। उन्होने कहा ये सर्प भी भाग्यशाली आत्मा होगा जो आप जैसे जीवदया प्रेमी के हाथों से मुक्त हो रहा है।
हार्दिक भाइ ने अपना अनुभव बताते हुए कहा की पहली बार इतने बडे सर्प को देखा है इसे कैसे पकडुं? परतुं डो.दवे के हाथ मे देखकर हिंमत आ गई डो.दवे के हाथो के इलाज से चोटिल सर्प ठीक हो चुका था पर इसको यहां से मुक्त कराने का अवसर प्राप्त मुझे मिला है यह सोचकर मेने इस अबोल जीव को उसकी आझाद दुनिया से रुबरु करवाने हेतु भगवान महावीर स्वामी दादा की प्रतीक मूर्ति के पास नागदेवता को बडी ही हिफाजत से रख दिया। यहां ज्ञात हो की नागदेवता को भगवान पार्श्वनाथदादा का लांछन माना जाता है ।
जैसे ही हार्दिक भाइ हुंडीया द्रारा सर्प को प्रतीमा के हाथ पर रखा गया वैसे ही वो प्रतीमा जी के हाथ से लीपट गया जब फिर से सर्प को हाथ मे लेने की कोशिश मेनै और महावीर श्रीश्रीमाल ने की पर वो एकदम मजबूती से प्रतीमा के साथ लीपट गया था । तब डो. दवे ने हार्दिक भाइ से कहा की आपके हाथों से मुक्त होकर यह सर्प को अब जंगल मे अपनी दुनिया मे जाने का सौभाग्य मिला है।
इसके बाद उस मोर के पिंजरे के पास आकर हार्दिक भाइ ने उस मोर को अपने दोनों हाथो से उठाकर जैसे ही उडाया वैसे ही अपनी आझादी से खुश होकर यह खुबसूरत मयुर पक्षी उड गया। हार्दिक भाइ ने पर्युषण महापर्व के पवित्र दिन में भगवान महावीर स्वामी पांजरापोल मे स्थित सारवार और सुसुश्रा से नवजीवन प्राप्त करने वाले अबोल जीव सर्प और राष्ट्रीय पक्षी मोर को स्वस्थ अवस्था मे आझाद कराने का अवसर प्राप्त करवाने का अवसर प्रदान करवाने पर ओल इडिंया जैन जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय महामंत्री महावीर श्रीश्रीमाल और अबोल जीवो की अद्वभुत सुसुश्रा करनेवाले जीवदया प्रेमी डो.दवे का आभार व्यक्त कीया।

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