नये यातायात नियमों के औचित्य पर विशेष सम्पादकीय…R.k.jain, editor in chief,key line times

R.k.jain

Editor in chief

Key line times

नये यातायात नियमों के औचित्य पर विशेष सम्पादकीय


लोकतंत्र में सरकार जो भी नियम बनाती है वह जनता के एंव देश के पक्ष में होते हैं ,क्योंकि नियम बनाने वाले जनता जनता द्वारा चयनित किये हुए जनप्रतिनिधी होते हैं। सरकार जनहित एंव देशहित में समय-समय पर नियमों कानूनों एवं संविधान में संशोधन करती रहती है। नियम कानून और दंड तीनों समाज के सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखकर बनाए एवं संशोधित किये जाते हैं।

हमारे यहां कहावत कही जाती है कि-” ककड़ी के चोर को फांसी नहीं दी जाती है” लेकिन जब कानून ककड़ी के चोर को फांसी देने लगता है तो कानून बनाने वाले सामाजिक व्यवस्था से कोसों दूर हो जाते है।

इस समय सरकार द्वारा यातायात नियमों एवं उसके तहत दिए जाने वाले दंडों में किया गया संशोधन या नया कानून चर्चा का विषय बना हुआ है और हर गली मोहल्ले चाय पान की दुकानों पर इसकी चर्चा ही नहीं हो रही है बल्कि पूरे देश में इसका समर्थन एवं विरोध ही नहीं बल्कि रोना चिल्लाना एवं बाइकों को जलाना शुरू हो गया है। इस नये यातायात नियम में जुर्माने की धनराशि इस कदर बढ़ा दी गई है कि अगर जुर्माने की सभी धनराशि को जोड़ दिया जाय तो पुरानी बाइक का मूल्य भी कम हो जायेगा।इस कानून को अभी एक सप्ताह पहले लागू किया गया है और इतने समय मे ही देश में तहलका मच गया है। यह सही है कि आज के बदलते समय में यातायात में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है और नई तकनीक से बने राजमार्गो पर रोजाना तेज रफ्तार दौड़ रहे दो पहिया एवं चार पहिया वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और लोगों की जान इन दुर्घटनाओं में जा रही है। इन दुर्घटनाओं में कुछ दुर्घटनाएँ इत्तिफाकिया होती हैं और कुछ चालक की विभिन्न गलतियों से होती हैं।इन दुर्घटनाओं में ऐसे सवार भी होते हैं जो नवयुवक या कम उम्र के होते हैं। दुर्घटनाएं हमेशा असावधानी एवं तेज रफ्तार के साथ ही नशे से होती है। यह सही है कि इन मार्गों पर जो दुर्घटनाएं बाइक से होती हैं और लोग राजमार्ग पर गिरकर घायल हो जाते हैं उनमें जो लोग हेलमेट लगाए रहते हैं अक्सर उनकी जान बच जाती है और हेलमेट हेड इंजरी होने से बचा लेता है। यह भी सही है कि कभी-कभी विशेष परिस्थितियों में लोगों को अपने बच्चों को भी बाइक देनी पड़ती है क्योंकि जिसके घर में कोई दूसरा नहीं है उसे बीमारी आजारी में लड़के की मदद लेनी ही पड़ती है। इस नए कानून के तहत बाइक सवारों के लिए हेलमेट न होने पर जुर्माने की दंड धनराशि बढ़ा दी गई है। सभी जानते हैं कि आज समाज में मोटर साइकिल भीख मांगने वाले के पास भी है लेकिन यह जरूरी नहीं है कि हर बाइक सवार के पास जेब में हमेशा 5 सौ रूपये हो ही कभी जेब में नहीं होते है क्योंकि इससे अधिक उनकी औकात नहीं होती है। इसी तरह यह भी सही है कि तमाम ऐसे भी लोग हैं जिनके पास बाइक चलाने का लाइसेंस उपलब्ध नहीं होता है लेकिन ऐसा भी नहीं है कि वह गाड़ी नहीं चला पाते हैं। नए कानून में लाइसेंस न होने पर भी जुर्माने की राशि बढ़ा दी गई है। सरकार द्वारा बनाए गए यातायात के नियमों को हम गलत नहीं कहते हैं बल्कि उन्हें जरूरी समझते हैं फिर भी सरकार द्वारा बनाया गया नया यातायात कानून आम जनता के गले नहीं उतर रहा है। इसी तरह चार पहिया वाहनों पर भी नए कानून में शिकंजा कसा गया है और विभिन्न यातायात नियमों के उल्लंघन करने पर दंड की राशि बढ़ा दी गई है। सरकार ने नए यातायात कानून में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने की धनराशि तो बढ़ा दी गई है लेकिन सरकार की तमाम अव्यवस्थाओं के चलते होने वाले हादसों पर रोक लगाने की व्यवस्था या हर्जाने की राशि में वृद्धि नहीं की गई।इतना ही नहीं नये कानून को बिना जनमानस को बताये ही लागू कर दिया गया है जबकि यातायात नियमों की जानकारी आमजनों को देना सरकार का दायित्व बनता है।नये या पुराने कानून के बारे में सत्तर फीसदी से ज्यादा लोग आज भी अनभिज्ञ हैं जबकि यातायात कानून नया नहीं बल्कि बहुत पहले से ट्रैफिक नियम बना है। सरकार हर साल लोगों को यातायात नियमों की जानकारी आमजन को देने के लिए विशेष यातायात पखवाड़ा मनाती है लेकिन वह मात्र औपचारिकता निभाने तक सीमित रहता है।यह सही है कि यातायात नियमों के उल्लंघन के चलते तमाम लोगों की मौते हो रही हैं जिन्हें रोकना सरकार का दायित्व बनता है लेकिन मौतों को रोकने के नाम पर औकात से ज्यादा भारी भरकम जुर्माना वसूलना भी उचित नहीं है।नये कानून के पहले बने कानून को सख्ती से लागू करने की जरूरत थी न कि जुर्माने की राशि बढ़ाने की। सभी जानते हैं कि रोजाना होने वाले हादसों में तमाम हादसे सड़क के किनारे अतिक्रमण एवं जंगली एवं आवारा पशुओं के कारण होते हैं। दुर्घटनाओं में कमी करने एवं होने वाली मौतों पर रोक लगाने के लिए सड़क पर चलने वालों के लिए सड़क सुरक्षा प्रदान करना सरकार का दायित्व होता है। यातायात नियमों को तोडऩे वालोपर निस्संदेह जुर्माना होना चाहिये लेकिन साथ साथ यातायात नियमों की धज्जियां उडवाने मे सहायक यातायात पुलिस कर्मियों की तो सेवाएं ही समाप्त करने का प्रावधान होना चाहिए क्योंकि इन यातायात पुलिस कर्मियों की घुसखोरी के कारण ही आटोचालक, वैन,बैटरी रिक्शा आदि निजी वाहन चालकों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर क्षमता से अधिक सवरी ठुस ठुस कर भरी जाती हैं आलम तो ये है कि आटो रिक्शा और बैटरी रिक्शा मे तो सवारियों के शरीर का आधा हिस्सा बाहर लटका रहता है।यें बैटरी रिक्शा, आटोचालक कहीँ भी बिच चौराहे पर मुख्य मार्ग को रोककर सवारियों को बैठाते हैं जिससे उनके पिछे का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है। ऐसा तब होता है जब यातायात पुलिस कर्मी अन्य वाहनों का चालान कर रहे होते हैं और ये बैटरी रिक्शा, आटो रक्षा रिक्शा, मिनी बसे, वैन,निजी बसों वाले यातायात पुलिस कर्मियों के सामने ही रैडलाईट पर, चौराहे पर, मेनरोड के कोने पर आडे तिरछे खडे होकर जाम लगाकर रखतें हैं, यातायात पुलिस कर्मी जानबूझकर इनकी ओर से आंखें मुंदे रहते हैं। इन वाहनो के 75% चालक बिना लाईसेंस और बिना वैध कागजात के धडल्ले से वाहन दौडा रहे हैं, केवल यही नही बल्कि यें वाहन चालक कब चलते चलते अचानक ब्रेक लगा दें कुछ पता नही कहावत है ” जब सैंया भये कोतवाल तो डर काहें का”

मै ये नही कहता कि यातायात नियमों का पालन नही करना चाहिए बल्कि मै ये कहना चाहता हूं कि जिस तरह से यातायात नियमों के पालन करने की जिम्मेदारी भारी दंड के साथ वाहन चालकों पर डाली गयीं है वैसी ही जिम्मेदारी अपने क्षेत्रों में तैनात यातायात पुलिस कर्मियों पर डाली जानी चाहिए, यदि किसी क्षेत्र मे यातायात नियमों का उल्लंघन किसी यातायात पुलिस कर्मी की छत्रछाया मे हो रहा है तो उस यातायात पुलिस कर्मी की सेवाएं भी समाप्त कर देनी चाहिए।और यदि सडकों पर अतिक्रमण , आवारा पशुओं का घुमना, सडकों के क्षतिग्रस्त होने की वजह से कोई जाम लगता है या कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित विभागीय अधिकारियों पर भी ऐसी ही दंडात्मक कार्यवाही के अंतर्गत उनकी सेवाएं समाप्त करने का प्रावधान होना चाहिए, दंडात्मक कार्यवाही ऐसे सभी लोगों पर होनी चाहिये जो यातायात नियमों को तोडऩे के लिये जिम्मेदार हो।मेरे विचार से यातायात नियमों का उल्लंघन के लिए आम जनता से ज्यादा यातायात पुलिस कर्मी, नगर निगम या नगरपालिका के अधिकारी या सडक निर्माण विभाग जिम्मेदार है देखते हैं सरकार आम जनता के साथ साथ इन पर क्या कार्यवाही करती है।

आर.के जैन

मुख्य संपादक

Key line times

7011663763,9582055254

Share this news:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *