निजीकरण के विरोध में तेजस का विरोध करने गाजियाबाद में ट्रैक पर उतरे रेलवे कर्मचारी

जे पी मौर्या, ब्यूरो चीफ,गाजियाबाद। निजीकरण के विरोध में नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवे मैन (एनएफआरआई) व उत्तर रेलवे मजदूर यूनियन (यूआरएमयू ) ने तेजस ट्रेन का विरोध किया। यूनियन के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को काले झंडे और हाथों में पट्टी बांध कर ट्रेन के आगे खड़े हो गए। भारी विरोध के बीच सात मिनट तक ट्रेन प्लेटफार्म पर खड़ी रही। तय समय के हिसाब से ट्रेन गाजियाबाद में सिर्फ दो मिनट रुकनी थी। उधर, कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों की जीआरपी और आरपीएफ जवानों के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई।

लखनऊ से दिल्ली के बीच शुक्रवार से शुरू हुई तेजस ट्रेन दोपहर 3:20 बजे पुराने रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर पहुंची। पूर्व घोषणा के तहत कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारी हाथों में काले झंडे और काली पट्टी बांधकर विरोध करने को तैयार थे। जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर रुकी तो यूनियन के कर्मचारी विरोध करते हुए इंजन के सामने आकर खड़े हो गए। उन्होंने निजीकरण के विरोध में सरकार विरोधी नारे लगाए। इसी बीच जीआरपी व आरपीएफ के जवानों ने उन्हें ट्रैक से हटाने की कोशिश की, जिसे लेकर काफी देर तक नोकझोंक व बहस होती रही।

करीब दोपहर 3:27 बजे फोर्स द्वारा ट्रैक को खाली कराया गया। इसके बाद ट्रेन गंतव्य स्थल (दिल्ली) की तरफ रवाना हो सकी। यूनियन के मेरठ मंडल के पदाधिकारी सरदार गुरजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि पहले से ही रेलवे में निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। काफी सारी सेवाएं निजी हाथों में दे दी गई है। अब तेजस ट्रेन को भी निजी हाथों से चलाया जा रहा है। इससे साफ है कि सरकार की नीति कर्मचारी विरोधी है, जिसके चलते विरोध जताने के लिए उतरना पड़ा है।

उधर, जीआरपी प्रभारी अशोक शिशौदिया का कहना है कि कर्मचारी यूनियन के लोगों ने विरोध किया है लेकिन उससे ट्रेन के शेड्यूल पर कोई असर नहीं पड़ा है। ट्रेन निर्धारित समय पर रवाना हुई है। यह सिर्फ सांकेतिक विरोध था।

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