गाजियाबाद : प्रदूषण से खराब हो रहे फेफड़े,किडनी और आंख, जानिए बचने के उपाय

गाजियाबाद। प्रदूषण के बढ़ते ग्राफ ने खतरे की घंटी बजा दी है। साल दर साल प्रदूषण का बढ़ती मात्रा और नाकाम होते उपाय लोगों के शरीर और दिनचर्या को प्रभावित कर रहे हैं। जानकारों के मुताकिब इसका असर फेफड़ों, किडनी और आंख पर पड़ने के अलावा गर्भस्थ शिशुओं के विकास पर असर पड़ रहा है। प्रदूषण की वजह से प्रसव में मुश्किल होने के अलावा गर्भपात तक की नौबत आ सकती है। प्री मेच्योर डिलिवरी भी हो सकती है। इसका असर आने वाली पीढ़ी को भुगतना पड़ सकता है।
गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक खतरा
वायु प्रदूषण के दौरान गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। गायनेेकोालॉजिस्ट डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि प्रदूषण के दौरान सांस के साथ जो प्रदूषण गर्भवती महिलाओं के अंदर जा रहा है, उसका असर होने वाले बच्चे पर भी पड़ता है। खासतौर पर बच्चे की ग्रोथ पर इसका बड़ा असर हो सकता है। उन्होंने बताया कि सबसे मेजर समस्या (इंट्रायूट्राइन ग्रोथ रेस्ट्रिक्शन) आईयूजीआर की होती है। यूट्राइन में पानी की कमी हो जाती है और महिलाओं को बच्चे को जन्म देने में काफी परेशानी होती है। खासतौर पर पूर्व प्रसव के मामले सबसे ज्यादा इसी कारण होते हैं। इसके अलावा वायु प्रदूषण से मिस कैरिज भी हो सकता है। गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक इन दिनों में ध्यान रखने की जरूरत है। अगर कोई गर्भवती महिला स्मोकिंग करती है तो यह बहुत ही खतरनाक है। घर में भी कोई स्मोकिंग करता है तो उसके धुएं से महिलाएं बचकर रहें। एयर प्यूरीफायर का प्रयोग शुद्ध हवा के लिए करें। दिन में जरूरी न हो तो बाहर न निकलें और घर पर ही आराम करें। अगर कामकाजी महिलाएं हैं तो घर से बाहर निकलते समय अच्छे मास्क का प्रयोग करें। सूती कपड़े को भी मुंह पर लपेट सकते हैं, जिससे वातावरण में मौजूद हानिकारक तत्व सांस के जरिए शरीर में न पहुंचे और होने वाले बच्चे को इससे नुकसान न हो।
आंखों की रोशनी और फेफड़ों को नुकसान
आईएमएस इंजीनियरिंग कॉलेज में बायोटेक्नोलॉजी विभाग की एचओडी प्रो. रश्मि चंद्रा ने बताया कि गाजियाबाद व एनसीआर प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच चुका है। दिवाली के पटाखों व हरियाणा-यूपी में परानी जलाने से स्थिति गंभीर हो चुकी है। प्रदेश की राजधानी लखनऊ भी इस बार इससे प्रभावित है। प्रदूषण ने पूरे शरीर के अंगों के साथ आंखों की रोशनी पर गहरा असर डाल रहा है। छोटे बच्चों की आंखों में चश्मा इसका एक उदाहरण है। प्रदूषण फेफड़ों को नुकसान पहुंचा रहा है। फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदूषण ने किडनी पर भी गहरा असर डाला है। लगातार यही स्थिति रही तो शरीर पर इसके गंभीर परिणाम होंगे। ऐसे में वर्तमान में सुबह-शाम टहलना पूरी तरह से छोड़ दें। सुबह-शाम व्यायाम और बच्चे खेलने से परहेज करें। बाहर निकलते वक्त मास्क का इस्तेमाल करें। महंगे एयर प्यूरीफायर से अधिक घर में कार्बन डाई ऑक्साइड को सोखने वाले प्लांट लगाएं। घर में कार्बन चारकोल का इस्तेमाल करें।
एयर प्यूरीफायर की जगह इन प्लांट का करें इस्तेमाल
– मनी प्लाट
– एलोवेरा
– पीस लिली
– वीपिंग फिग
– ड्रेसीना
– बेम्बू पाल्म्स
– स्पाइडर पल्म्स
– बोस्टन फर्न
घर में रखें कार्बन चारकोल
प्रदूषण की रोकथाम के लिए घरों में महंगे एयर प्यूरीफायर की जगह कार्बन चारकोल को रखकर राहत पाई जा सकती है। कार्बन चारकोल आसानी से बाजार में उपलब्ध है।

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