परंपरागत जैविक खेती को बढ़ावा देने को लेकर एक दिवसीय संगोष्ठी संपन्न

जोधपुर ब्यूरो चीफ अमर यादव@कि लाइन टाइम्स न्यूज़। मरुधर गंगा सोसायटी माणकलाव एवं कट्स इंटरनेशनल के संयुक्त तत्वाधान में जैविक खेती परंपरागत खेती को बढ़ावा देने एवं किसानों में जागरूकता लाने के उद्देश्य को लेकर सेखाला ब्लॉक के भालू कला गांव मे सुबह एवं दोपहर बाद शाम के समय भालू राजवा गांव में एक दिवसीय किसानों की संगोष्ठी का आयोजन किया गया।
बैठक के दौरान मरुधर गंगा सोसायटी माणकलाव के मुख्य कार्यकारी भारत कुमार भाटी ने किसानों को जानकारी देते हुए बताया कि एक वो भी समय था तब हमारे पूर्वज परंपरागत खेती किया करते थे उस दौर मे जो खेती से प्राप्त खाद्यान्न मे गुणवत्ता बहुत ही ऊंचे दर्जे होती थी,लेकिन आज से कुछ दशकों पहले हमारे देश में खाद्यान्न मे भारी गिरावट आई जिसके फलस्वरूप हमारी सरकारों एवं राष्ट्रीय कंपनियों ने मिलकर सब्सिडी देकर किसानों की आदतें बिगाड़ने का काम किया गया,अंग्रेजी खाद व अंग्रेजी दवाइयां का अधिकाधिक उपयोग करने से पैदावार तो जरूर बढ़ गई पर खाद्यान्न की गुणवत्ता में भारी गिरावट आ गई, इंसान अधिक पैदावार लेने के चक्कर में रासायनिक खाद व दवाइयों का खूब उपयोग कर मिलावटी व जहरीला अनाज पैदा कर रहे है उस अनाज को खाने से लोगों की सेहत में दिनोंदिन गिरावट आ रही है और व्यक्ति इतना व्यवसाई को गया कि अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज करते हुए ज्यादा से ज्यादा फैसले लेने के लिए पैदावार बढ़ाने के चक्कर मे अपने जीवन को संकट में डाल रहा है। अगली कड़ी में कट्स जयपुर से पधारे हुए कृषि अधिकारी राजदीप पारीक ने संगोष्ठी के दौरान किसानों को संबोधित करते हुए बताया कि जमीन में जल स्तर दिनों दिन नीचे जा रहा है ग्लोबल वार्मिंग के वजह से धरती का तापमान बहुत ज्यादा तेजी से बढ़ रहा है आने वाले समय में तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा क्योंकि नदियों का मीठा पानी ग्लेशियर व तापमान की वजह से लगातार निकलकर समुद्रों में जाकर पानी खारा होता जा रहा है,सरकारों द्वारा उचित प्रबंधन नहीं होने के कारण आनेवाले दिनों मे पानी का संकट बहुत तेजी से मानव जीवन को खतरे में डाल सकता है,इन चुनौतियों से समाधान करने के लिए हमें जैविक खेती एवं परंपरागत खेती को बढ़ावा देना होगा, कम पानी से पैदा होने वाली फसलों को लेना होगा,धरती पर प्रदूषण में कमी लाना,पर्यावरण को बढ़ाना,वर्षा जल को संग्रहित करना,उचित प्रबंधन करना तथा देसी खाद और देसी दवाइयो का इस्तेमाल कर खाद्यान्न की गुणवत्ता को बढ़ाना आदि कार्य हमें निकट भविष्य में करने होंगे,वरना आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी ।इसके अलावा संगोष्ठी में सिमरथाराम पथिक,मोहनलाल बौद्ध,अशोक कुमार,भरत लखानी, प्रेम लखानी,हरिशंकर कड़ेला, बाबूराम फौजी,पेपा राम आदि किसानों ने भाग लेकर कार्यक्रम की सराहना की,संगोष्ठी मे बताई गई बातों को जीवन में अनुसरण करने का संकल्प भी लिया।

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