शिक्षा के साथ छात्रों को संस्कारवान बनाएं- महंत औंकार भारती

सुवालिया। विद्या रुपी धन सबसे अमूल्य धन होता है।शिक्षा के साथ संस्कारवान बनें।सदैव मेहनत के पथ पर अग्रसर होते हुए अपनी योग्यता को सफलता के मुकाम तक पहुंचाए।- ये विचार परेऊ मठ के महंत श्री औंकारभारती महाराज ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सुवालिया में शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में प्रकट किये।
महंत भारती ने कहा कि अध्यापक अनुशासन और ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर देश के विकास में भागीदार बनें।
महंत औंकारभारती ने विद्यालय परिसर में नवनिर्मित सरस्वती के मंदिर का उद्घाटन किया। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की।प्रधानाचार्य सत्येंद्रसिंह चौहान के विदाई कार्यक्रम में समस्त स्टाफ, पीईईओ क्षेत्र के अध्यापकों व ग्रामवासियों ने अभिनंदन किया।विद्यालय में उनका योगदान सदैव अविस्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम में शेरगढ के मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी प्रदीप कुमार जाणी, सुवालिया के सरपंच रामसिंह राठौड़, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सत्येंद्रसिंह चौहान, देवराजगढ के प्रधानाचार्य किशन लाल अवाना, व्याख्याता मदनसिंह राठौड़, डॉ अमिता कुलहरी, जगदीप ढिढारिया, दीपसिंह चौहान, डूंगरराम, सीयाराम गुर्जर ने अपने विचार प्रकट किये।मदनसिंह राठौड़ को कार्यवाहक प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपा गया।कार्यक्रम का संचालन शारीरिक शिक्षक मुन्नाराम चौधरी ने किया।
इस अवसर पर पुष्पादेवी, भोलाराम मीणा, डूंगरराम, प्रबोधक विक्रमसिंह राठौड़, मेघराज मीणा, सुभाष सैनी, पदमाराम मेघवाल, सुमेरसिंह, कैलाश मीणा, मुनेश कुमार यादव,भलाराम बेनिवाल, चिमनकुमार, चोखाराम, दुर्गसिंह, नरेन्द्र कुमार, विजयकुमार, ओमेश मीणा, देवीदास संत,जसराज चौपड़ा,ओमप्रकाश राठी, भीखमचंद राठी, कमलेश, हरिसिंह भाटी, दलपुरी गोस्वामी, बाबूदास वैष्णव, जोगेन्द्रसिंह, मालमसिंह भाटी सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे।

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