कवि राठौड़ ने कोरोना पर रची कविता

निर्मल जैन/की लाइन टाइम्स न्यूज़।

वैश्विक महामारी कोरोना से बचाव व जन जन में जागृति पैदा करने के लिए मायड़ भाषा राजस्थानी के सुप्रसिद्ध कवि साहित्यकार मदनसिंह राठौड़ सोलंकिया तला ने ‘कोरोना रौ कहर’ नामक कविता की रचना की।जिसमें कोरोना महामारी की गंभीरता, उसके लक्षण एवं संक्रमण से बचाव के उपाय व सावधानियों से आमजन को रुबरु करवाया है।इस वैश्विक महामारी के विकट समय में इस समसामयिक शिक्षाप्रद कविता के माध्यम से कवि राठौड़ ने अपने कविधर्म का सच्चा निर्वहन किया है।

कोरोना रौ कहर -

इळ पर संकट आवियौ, कोरोना बण काळ।
टाळण सूं टळसी सखा,विपदा है विकराळ।।

महामारी फैली मही, हड़कंप हाहाकार।
दुनिया आखी देखलौ, पब्लिक करै पुकार।।

विपदा बाधा अर वळै, दुविधा सूं रह दूर।
कोरोना रै कहर सूं, मुलक हुवौ मजबूर।।

फिरणौ नांही फालतू, हमें नी जाणौ हाट।
बैठ किताबां बांचणी, खरी ढाळदौ खाट।।

हाथ धोवणा हर व़गत, साबुन सूं कर साफ।
सजग रहण सूं साथियां, गिरै बिमारी ग्राफ।।

खुली हवा नीं खांसणौ,मुखपर मास्क लगाव।
कोरोना रै कहर सूं, बेली करौ बचाव।।

पांणी पीणौ गरम कर, हरदम धोणा हाथ।
जीवण नै अब जीवणौ, सावधानी रै साथ।।

सूखी खांसी छींकणौ, दोरौ आवै सांस।
बुखार सह दूखै बदन, ऐ लक्षण है खास।।

अफवा सूं अळगा रहो, सतर्क रहो सुजान।
सावचेती अर सजगता,स्वस्थ जग री शान।।

वीर भरत रा वंशजों!, जाग्यां होसी जीत।
सजग होय रहणौ सदा, मजबूती सूं मीत।।

वायरस वाळी विपदा, आय पड़ी अणपार।
बड़ाबड़ी टाळण बळा, तुरत रहो तैयार।।

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