श्रीचन्द जी दुगड़ ( संसार पक्षीय भाई — ( परम् पूज्य आचार्य महाश्रमण जी ) —
महावीर सेमलानी

Surendra Munot, key line times, state head West Bengal
दृढ़ निष्ठा नियम निभाने में
हो प्राण बलि प्रण पाने में
श्री श्रीचन्द जी दुगड़
संसार पक्षीय भाई
【परम पुज्य गुरुदेव】
—महावीर बी सेमलानी–
*श्री* से ही होती शुरुआत जिनकी, उनकी तो बात ही कुछ ओर है । स्वत ही आदरणीय पूजनीय है वो स्वत बन जाते सबके सिरमौर है । अनुशासनप्रिय वो उसूलों के पक्के, नियम, सिद्धान्तों की पक्की डोर है। सहज सरल विनम्र धर्मनिष्ठ व्यक्तिव *श्रीचंद जी* की गुरुभक्ति बेजोड़ है । गौरान्वित दुगड़ कुल सरदारशहर का महाश्रमण सहोदर इस जग के भोर है गौरान्वित संघ सेवक आपको पाकर, हाजिरी आपकी मङ्गलमय पुरजोर है|| ♾️

राजस्थान के चुरू जिले का गौरवशाली शहर – सरदारशहर, जिसे तेरापंथ की राजधानी भी कहा जाता है और सरदारशहर का दुगड़ परिवार जिसे गौरव प्राप्त है तेरापंथ के एकदशमाधिशास्ता आचार्य श्री महाश्रमणजी के संसारपक्षीय परिवार होने का |

इसी दुगड़ परिवार में जहा मां नेमा की रत्न कुक्षि से गुरुदेव महाश्रमणजी ने जन्म लिया मां नेमा की छह संतानों में सबसे छोटे और सबके लाडले- श्री श्रीचन्दजी दुगड़ |

22 अप्रैल 1964 को सरदारशहर में जन्मे श्री श्रीचन्दजी दुगड़ ने अपनी 12 वीं तक की शिक्षा सरदारशहर में ही ग्रहण की। शिक्षा पूर्ण कर वे जोरहाट (आसाम) में पारिवारिक व्यवसाय से जुड़ गए। सन 1988 से लगभग 12 वर्षों तक टेक्सटाइल इंडस्ट्री में आपने सर्विस की। और वापी (गुजरात) में बस गए।

व्यवसाय के साथ साथ अपने संघीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए आपने 1999-2000 में वापी सभा के मंत्री के रूप में सेवाएं देनी प्रारंभ की और वर्तमान में 2019 से आप जैन श्वेतांबर तेरापंथी ट्रस्ट वापी के अध्यक्ष के रूप में सेवाएं दे रहे है।

श्री श्रीचन्दजी दुगड़ – एक ऐसा सरल, सहज, विनम्र, उदात विचारों से सपन्न व्यक्तित्व जो अपने से मिलने वाले हर किसी के मन पर अपना एक अलग प्रभाव छोड़ता है। आप जितने कोमल ह्रदय है उतने ही अनुशासन प्रिय। वर्तमान अनुशास्ता के भ्राता है तो अनुशासन प्रिय होना स्वभाविक भी है। नियमों, सिद्घान्तों व असूलों के पक्के और उनका पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करने वाले और कराने वाले श्रीचन्दजी आज अनेकों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा बने हुए है।

दृढ़ निष्ठा नियम निभाने में, हो प्राण बलि प्रण पाने में
संघीय संस्थाओं में कार्य की बात हो या व्यक्तिगत जीवन की बात हो, आप इस वाक्य को चरितार्थ करते है। जो प्रण लेते है, जो संकल्प संजोते है, उसे पूर्ण करने में सर्वथा समर्पित हो जाते है। आपकी नियम निष्ठा का एक छोटा सा उदाहरण बताना चाहूं तो हम अनेकों बार देखते है कि आप पूज्यप्रवर के संसारपक्षीय भाई होने के बाजूद, चरणस्पर्श के लिए लगने वाली कतारों में आप व्यवस्था का पालन करते हुए अन्य श्रध्दालुओं की तरह ही कतार में खड़े रहकर गुरुदर्शन करते है। यह तो एक छोटा सा उदाहरण है, आपके दैनिक जीवन से हमें और भी कितनी कितनी प्रेरणा मिलती है।

जिस परिवार से स्वयं गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमणजी, साध्वी श्री सुमतिप्रभाजी, साध्वीश्री चारित्रयशाजी आदि दीक्षाएं हुई हो, उस परिवार के धार्मिक संस्कारों की उच्चता अपने आप में प्रतिष्ठित है। श्री श्रीचंदजी दुगड़ भी आध्यात्मिकता से ओत:प्रोत व्यक्तित्व है, धर्म आराधना में स्वयं भी लीन रहते है एवं अन्यों को भी धार्मिक प्रेरणा देने में संलग्न रहते है।

समय का श्रेष्ठ नियोजन करते हुए आप अल्प अल्प अंतराल में ही पुनः पुनः गुरुसेवा में सहपरिवार उपस्थित होते रहते है। संपूर्ण परिवार की संघ भक्ति व गुरु भक्ति बेजोड़ है।

हर वर्ष पूज्यप्रवर के जन्मोत्सव, पट्टोत्सव, दीक्षा दिवस के अवसर पर संपूर्ण परिवार भक्तिभाव एवं बड़े हर्ष के साथ श्रीचरणों में उपस्थित होता है। किंतु इस वर्ष कोरोना महामारी के संदर्भ में चल रहे लोकडाउन के कारण दुगड़ परिवार पूज्यप्रवर की सेवा में उपस्थित नहीं हो सका। आज पूज्यप्रवर के जन्मोत्सव के पावन अवसर पर आप संघ सेवक परिवार के साथ प्रश्नमंच के द्वारा श्रीचरणों में अपनी श्रद्धा प्रणति प्रस्तुत कर रहे है।

हम सभी को सात्विक आनंद एवं गर्व है कि ऐसे व्यक्तित्व हमारे संघ सेवक परिवार के सदस्य है। आपके प्रति अनंत मंगलकामनाएं !
🙏🏻
असीमित मंगलकामनाएं
—–अमृतवाक्य——
संघ सेवा करते रहे
लेखक- महावीर सेमलानी
सहयोग- संजय वैद मेहता
रचना- सुशील दुगड़ स्पर्श

Share this news:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *