शान्ति के महासूर्य
अणुव्रतअनुशास्ता आचार्य श्रीमहाश्रमण जी…..श्रद्धानत-
डॉ.कुसुम लुनिया

R.k.jain, editor in chief,Key line times

🇮🇳शान्ति के महासूर्य🇮🇳
अणुव्रतअनुशास्ता आचार्य श्रीमहाश्रमण जी

संयम के संकल्प से सबसे बडा लोकतान्त्रिक देश भारत वर्तमान वैश्विक चुनौती का साहस से सामना करते हुए दुनिया के समक्ष नजीर पेश कर रहा है।आध्यात्मिकता इस देश की असली ताकत है।आदियुग प्रवर्तक ऋषभदेव,मर्यादापुरूषोत्म राम, श्री कृष्ण,महात्मा बुद्ध,राष्ट्रपिता गांधी,डॉ.राधाकृषणन,स्वामी विवेकान्द,आचार्य तुलसी ,डॉ.कलाम, आचार्य महाप्रज्ञ आदि ने इस धरा को आप्लावित किया है।इसी श्रृखला की एक मजबूत कडी का नाम है “अणुव्रतअनुशास्ता आचार्य श्रीमहाश्रमण जी*।
बैसाख शुक्ल नवमी 13 मई 1962 को सरदार शहर की पुण्य धरा पर झूमरमंल दुगड के घर मां नेमादेवी ने बालक को जन्म दिया ।नाम रखा मोहन ,8 भाई बहनों में सातवें नंबर पर यह बालक बेहद चंचल था ।अपने पहली गुरु माँ से सन्त समागम के संस्कारों को पाकर उसकी चंचलता का प्रवाह विधायक दिशा में हो गया । आप वैरागी बन गए ।मुनिश्री सुमेर मल जी लाडनूं द्वारा 5 मई 1974 को सरदारशहर राजस्थान में आपकी दी़क्षा हुई। ज्ञान की अभिरूचि, लक्ष्य तक पहुँचने की प्रबल चाह और सतत् पुरुषार्थ से मात्र 42 दिनों में पूरा दशवैकालिक कंठस्थ कर लिया ।दीक्षा के छ: सात महीनों में अंग्रेज़ी और संस्कृत का बेहद अच्छा ज्ञान कर लिया ।
जागरूकता के साथ विकास के सोपानो को तय करते हुए 13 मई 1981 को गुरूदेव तुलसी के निजी कार्यों में नियुक्त,16 फरवरी 1986 को युवाचार्य महाप्रज्ञ के अंतरंग सहयोगी, 14 मई को ग्रुप लीडर, 9 मई 1989 को महाश्रमण पद गुरूदेव तुलसी द्वारा,आचार्य श्री महाप्रज्ञ द्वारा युवाचार्य पद 14 सितम्बर 1997 को प्रदान किया गया।आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के महाप्रयाण के बाद आप तेरापंथ धर्म संघ के एकादशम अधिशास्ता हुए। बैशाख शुक्ला दशमी 3 मई 2010 के दिन आपका पदाभिषेक हुआ।
श्रेष्ठ प्रशासक के रूप में प्रभावशाली प्रशासनिक क्षमताओं के साथ आपने दूरदर्शी बेजोड निर्णय लिए।अनुशासन,मर्यादा,व संगठन के समन्वयक आचार्य महाश्रमण श्रेष्ठताओं के समवाय हैं।असीम उर्जा व अटूट कर्मजा शक्ति के पुंज गुरूदेव आदर्श शिक्षक है।
महान लेखक आचार्य प्रवर की लेखनी सुधि पाठकों के दिल दिमाग से सीधा तारतम्य जोड लेती है।आपकी लेखनी के अनेको चमत्कारों में से एक “महात्मा महाप्रज्ञ” विलक्षण कृति है।
इक्कीसवीं के प्रेरणा पुरूष आचार्य प्रवर महिला शक्ति संवर्धक हैं।आपकी असीम कृपा से ही मैं अपना समय सृजनशील सकारात्मक कार्यों में नियोजित कर पाती हूं। हजारों हजारों बहिने आपसे नई शक्ति पाकर नया संसार रचती है।
राष्ट्र विकासक-जनकल्याणक आचार्य प्रवर ने 2014 में दिल्ली के लाल किले से अंहिसा यात्रा का आगाज किया तो नेपाल के उप राष्ट्रपति ने आपके संग पैदल चलकर नये इतिहास का निर्माण किया। विदेश की धरा को धन्य करने वाले आप तेरापंथ के पहले आचार्य बने।
राष्ट्र के स्वर्णिम वर्तमान आचार्य प्रवर के अमृत महोत्सव पर अमृतपान करने महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जी राजस्थान पधारी। अनेक राज्यों के राजकीय अतिथी पूज्य प्रवर का चैन्ने चातुर्मासिक प्रवेश के पहले दिन स्वयं मुख्यमन्त्री ने स्वागत किया।
शान्ति के महासूर्य आचार्य महाश्रमण अंहिसा यात्रा मे हजारों किलोमीटर की पदयात्राओं द्वारा लाखों लोगो को नैतिकता,नशामुक्ति और सद्भावना का संदेश देकर पवित्र कर रहे हैं।आपके पावन आभावलय का चमत्कार है कि जंहा आप विराजित हैं वह क्षेत्र महाराष्ट्र सरकार द्वारा बहुत पहले ही ग्रीन जोन घोषित हो चुका है।आपके जन्मोत्सव, दीक्षा महोत्सव और पटोत्सव के विशेष दिवसों पर भी समग्र धर्म संघ को वर्धापना समरोह के बजाय सिर्फ तप,जप आदि आध्यात्मिक कार्यो द्वारा शान्तिपाठ की प्रेरणा दी है।

  • अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण के 11 वें पदभिषेक दिवस पर हार्दिक अभ्यर्थना करते हैं।महा युगनायक,महामनस्वी महायशस्वी, महातपस्वी, महाउर्जस्वी परम पुज्य आचार्य प्रवर युगों युगों तक मानवता आपसे आप्लावित होता रहे–ऐसी हमारी असीम मंगल कामनाएं हैं।*

श्रद्धानत
डॉ.कुसुम लुनिया

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