मातृ दिवस : चित्रकला के चित्रण से माँ की ममता को सराहा बच्चों ने

रामदेव सजनाणी /आऊ – मदर्स डे: आज वैश्विक महामारी कोरोना विपदा में स्कूले बन्द पड़ी हैं पर बच्चो की कलाकृति को कोरोना कैसे रोक सकता है। बाप तहसील के ग्राम कलराबा बेरा से स्कूली बच्चे करिश्मा पूनिया व राहुल पूनिया ने हैपी मातृ दिवस पर अपनी चित्रकला से माँ की आंचल को जन्नत के रूप में चित्रण करते हूऐ माँ के ममत्व को अनमोल रत्न बताया है। 10 मई का दिन मदर्स डे जो सम्पूर्ण मातृ शक्ति को समर्पित एक महत्वपूर्ण दिवस है। इस श्रष्टी पर असंख्य जीवों की उत्पत्ति है, जिनमे ममत्व, त्याग, समर्पण गुण की महानता को देखेंगे तो हर जुबां पर माँ ही शब्द होता है। हर एक के जीवन मे माँ एक अनमोल इंसान के रूप में होती है जिसके बारे में शब्दों से बंया नहीं किया जा सकता है। माँ का विराट हद्दय एक पाठशाला है ओर यही कारण है कि समूचे श्रष्टी जगत मे माँ से बढकर कोई इंसानी रिश्ता नही है। पर आजके तकनीकी युग की चकाचौंध के साथ मानव स्वार्थी जीवन ने भारतीय संस्कृति सभ्यता के संस्कार सुकून को बाधीत किया है। जिसे हम आमदिन में बुजुर्गो के होते तिरस्कार की घटनाओं से जान सकते हैं। आज के युग में बुद्दीजीवी मानव प्राणी अपने लालची जीवन मे संस्कार व अतीत के पारिवारिक जीवन को भूल जाता है। पर आज मदर्स डे पर इन स्कूली बच्चों की चित्रकला के जज्बै ने एक सन्देश दिया है की जन्मदाता को जीव प्राणी कदापी भूल नहीं सकता है। माँ शब्द कहनो को तो वह एक इन्सान होती है, लेकिन भगवान से कम भी नहीं होती है। वही मन्दीर है, वही पूजा है ओर वही तीर्थ है।

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