देशव्यापी लॉकडाउन के कारण आम और लीची के बगवानी करने वाले किसान हैं परेशान.

क्या ?आम और लीची के उत्पादन पर भी दिखेगा कोरोना का असर।

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR

मुजफ्फरपुर : देशव्यापी लॉकडाउन के कारण बिहार के किसान त्राही-त्राही कर रहे हैं।
पहले मौसम की मार और अब लॉकडाउन में आम लीची से लगी किसानों की उम्मीदों पर पानी फिरता नज़र आ रहा है।
मौसम लीची और आम का है पेड़ों पर फल लगने को हैं.. लेकिन लॉकडाउन के कारण ठप पड़ी गाड़ियों और आवाजाही न होने की वजह से लीची और आम के किसानों को अपनी पूरे साल की मेहनत बर्बाद होती दिखाई दे रही है।

45000 किसान-32000 हेक्टेयर में हैं लीची के बागीचे

सरकार कह रही है हम काम कर रहे हैं। किसानों की आय में इजाफा और इस विपदा में किसानों को कोई परेशानी न हो उसे लेकर लगातार कोशिशें जारी हैं। जिसके लिए मीटिंग दर मीटिंग हो रही है।

इधर गाड़ियों के नहीं चलने और एक राज्य से दूसरे राज्यों की सीमाएं बंद होने की वजह से व्यापारी किसानों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
किसानों को शक है कि सरकार जल्द इन बिषय पर कोई ढोस बिकल्प नहीं निकाला तो इस बार फल पेड़ों पर ही लगे के लगे रह जायेंगे। इस सोच से बिहार के किसानों के माथे पर पसीना बढ़ता जा रहा है।

बिहार में लीची के करीब 45000 से अधिक छोटे-बड़े किसान है और बिहार हॉर्टीकल्चर विभाग के अनुसार 32000 हेक्टेयर भूमि में लीची की बागवानी की जाती है। अगर लीची के उत्पादन की बात करें तो 0.30 मिलियन मिट्रिक टन यानी तीन लाख टन से अधिक बिहार में लीची का उत्पादन होता है।
जिसमें अकेले मुज्जफ्फरपुर में करीब एक लाख टन लीची का उत्पादन होता है. बिहार में सबसे अधिक प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर और वैशाली की लीची है. हालांकि इसका उत्पादन मोतिहारी और पुर्णिया जिले में भी होता है।

वही आम पर मौसम की मार के बाद कोरोना का साया दिख रहा हैं जिसको लेकर उत्पाद करने वालें किसानों से लेकर व्यपारी वर्ग भी चिंतित हैं।

आम की खेती से जुड़े किसान और कारोबारियों की तीन-चार महीनों में अच्छी खासी मुनाफे हो जाया करती थी, लेकिन इस बार कोरोना की वजह से किसान और कारोबारी के मुताबिक 70-80 प्रतिशत तक नुकसान का अंदाजा लगाया जा रहा हैं ।

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