वाल्मीकिनगर खूबसूरत वादियों का एक नाम ! सौंदर्य को समेटे कुदरत का अदभुत नजारा…

वाल्मीकिनगर बिहार का एकलौता सिद्ध – प्रसिद्ध और मनमोहक जगह।

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR

बिहार :पश्चिमी चंपारण (West Champaran) जिले के सबसे उत्तरी भाग में नेपाल की सीमा के पास वाल्मीकि नगर जो बेतिया से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह एक छोटा कस्‍बा है जहां कम आबादी है और यह अधिकांशत: वन क्षेत्र के अंदर है। यह उत्तर में नेपाल के रॉयल चितवन नेशनल पार्क और पश्चिम में हिमालय पर्वत की गंडक नदी से घिरा हुआ है।

वाल्मीकिनगर खूबसूरत वादियों का जगह, महर्षि वाल्मीकि की तपो भूमि,
लव -कुश जन्म स्थल ,सीता माता का पाताल लोक में जाने वाला वो स्थान, घने जंगलों के लिए जटाशंकर दैवीय स्थान, शक्ति पीठ नरदेवी माता और मदनपुर देवी का स्थान, वैदिक गुरुकुल मोक्ष धाम।


तीन नदियों का संगम त्रिवेणी, गंडक नदी के एक किनारों पर बना पर्यटक इको पार्क, वाल्मीकि टाईगर रिजर्व गंडक नदी के ऊपर बना 36 पायो का बराज,
सोनवा नदी के नाम से जाने जानने वाला विख्यात नदी जिसके झील से बहते पानी में बहता सोने का छोटा – छोटा कड़,


हलचल मन को शांत कर देने वाला नदीं के पानियों के हिलोड़ें की मनमोहक आवाज़,
चम्पा जैसे सुगन्धित पुष्प का भूमि चम्पारण,
वही वाल्मीकिनगर के दूसरे छोर पर बसा नेपाल जहाँ शीश महल के नाम से जाने जाने वाला तीर्थस्थल,
वाल्मीकि नेपाल से धौलागिरी पर्वत की श्रृंखला इन खुली आँखों से बिल्कुल साफ देखी जा सकती है।

एक साथ अनगिनत विशेषता और खूबियों को अपने में समेटे कुदरत का अदभुत नजारा…केवल वाल्मीकिनगर में हैं।
जहाँ पर्यटकों के ठहरने, खाने का उत्तम और समुचित व्यवस्था हैं।
पर्यटक दूर दराज से चलकर यहाँ आते ही रहते हैं।

बिहार सरकार द्वारा पर्यटकों को उपलब्ध की गई व्यवस्थाओं के बिच रात्रि मे टाईगर रिजर्व के वाहनों से घने जंगलों में अलग -अलग तरह के जीव – जंतु, और जानवरों को देखकर लुप्त उठाते रहना इसकी विशेषता हैं।

वाल्मीकिनगर में ही दोन के नाम से मशहूर प्रसिद्ध खुबशुरत स्थानों पर पर्यटक पहुंचकर कश्मीर के यादों को पुनः तरों ताज़ा कर लिया करते हैं।

केवल पश्चिम चम्पारण की ही नहीं बिहार का एक मात्र पर्यटक स्थल है। जिसे बिहार का कश्मीर ही कहा जाता है।

अगर नौका विहार की बातें की जाए तो यहाँ वाल्मीकिनगर गंडक नदी में बोट सवारी की व्यवस्था भी हैं। संघ्या गंडक नदी के किनारों पर पैदल टहलते वक़्त लोग , मुम्बई की मरीन की यादों को तरोताज़ा कर लेते हैं।

हाल फिलहाल नवनिर्मित ईको पार्क की सजावट के बिच बनावट से पर्यटकों को वहां शुकुन मिलती हैं।
बिहार से अलग-अलग जगहों से आये विद्यालयों से बच्चों को भ्रमण कराने का सिलसिला कभी थमता नहीं हैं।

महर्षि वाल्मीकि के आश्रम मे माता सीता का वन काल के दिन भी यही व्यतीत हुए। जहाँ माता सीता ने इसी वन में लव कुश जैसे तेजस्वी बालकों को जन्म देकर इस स्थान को सदा के लिए कृति स्थापित कर दी।

बिहार के एक मात्र टाईगर रिजर्ब होने का गौरव प्राप्त है, जहाँ बारह सिंघा भी थोड़ी शाम होने पर स्वतः दिख जाते है।

थरुहट बाहुल्य क्षेत्र के खान -पान भी मनमोहक होते है जिसका आसानी पूरक मील जाने से बाहर से आये पर्यटक को आनन्दी भुजा , विशुद्ध दूध , दही के साथ देशी देहाती उपलब्ध होता हैं।

Share this news:

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *