एक समय था ज़ब बिहार में एक साथ कई छोटे बड़े उद्योग हुआ करते थे।

राजनीती उदासीनता के कारण आज बिहार में उद्योग लगभग नहीं के बराबर।

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR

बिहार : ( Bihar ) एक साथ छोटे बड़े अनेक उद्योग धीरे-धीरे बंद हो गये। कितनी सरकारें आई लेकिन कभी किसी ने उसे चालू कराने पर पहल नहीं किया।


अगर ये उद्योग प्राम्भ से चालू होते तो शायद बिहार कि स्थिति और बेहतर और मजबूत होती। बिहार से चलकर दूसरे राज्यों में पलायन करने वाले मजदूर यही बिहार में ख़ुशी पूर्वक अपना जीवनयापन करते। अगर बिहार में ये सभी उद्योग चालू रहते तो मजदूरों कि स्थिति काफ़ी सुदृण रहती।

बिहार से चलकर दूसरे राज्यों में काम के लिए मारे-मारे फिर रहे इन मजदूरों कि स्थिति इतनी कमजोर नहीं होती। एक तरह राज्यों मे उद्योग जगत को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार इस पर बल दे रही हैं, वही बिहार में लगे लगाए सभी उद्योग कारखाने लगभग – लगभग ज्यादातर बंद हो गए।

बिहार में सभी वर्गो के लोगों को अपनी जीविका को चलाने का मुख्य जरिया होता प्रदेश में. लेकिन अब प्रदेश से चलकर परदेशी बनने के लिए विवस हैं लोग।


घर परिवार को छोड़कर इस कोरोना लॉकडाउन में प्रवासी मजदूर जितनी कठिन परिस्थितियों का सामना किये हैं शायद नहीं करते।


बिहार सरकार को चाहिए राज्य में बंद पड़े उन सभी उद्योगों को कारखानों को पुनः नए सिरे से तैयार कर चालू करें जिससे बिहार से पलायन होने वाले श्रमिकों को यही रोजगार मिले।

वर्तमान में में अधिकांतः उद्योग करखाने बंद हैं

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