दिल्ली में करोना योद्धाओं की यह हालत है तो आम जनता की क्या होगी

● अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से कोरोना संदिग्ध एस.आई. की हुई मौत

दिल्ली पुलिस एस.आई. रामलाल बोरघरे जी को 5-6 दिनों से लगातार खांसी व बुख़ार की तकलीफ होने के कारण 2 जून, 2020 को MGS Superspeciality Hospital, Punjabi Bagh उनके परिवार द्वारा ले जाया गया। MGS ने प्रवेश से पहले रामलाल जी को covid19 टेस्ट करवाने के आदेश दिए। उनके छोटे बेटे आकाश बोरघरे ने Covid helpline No. 011-23469526 को कॉल करके सहायता माँगी। उधर से जवाब यह मिला कि रामलाल जी को उनके कार्यालय Legal cell, West District, Rajauri Garden, Delhi जहाँ वे कार्यरत्त थे वहाँ ले जाया जाए। वहाँ पहुँचने पर उन्हें D.D.U Hospital (Deen Dayal Upadhyaya Hospital) जाने को कहा गया। DDU Hospital पहुंचकर डॉक्टर ने उनको Tulip Grand Hotel (Covid Healthcare Center) जा कर test कराने को कहा। Hotel पहुँचने पर रामलाल जी और उनके परिवार को यह कहकर मना कर दिया गया कि ये Hotel, DDU Hospital से आये Patients का कोरोना test नहीं करेगा। परेशान होकर आखिर आकाश ने MGS Hospital को कॉल करके पता लगाया कि वे Covid19 Test कर रहे हैं या नहीं क्योंकि सरकारी अस्पतालों से test हों जाने की कोई उम्मीद नज़र नही आ रही थी। MGS अस्पताल वापस जाने पर उनको कहा गया कि test हो जायेगा मगर MGS के निजी डॉक्टरों द्वारा ही Test कराने की अनुमति होनी चाहिए। अगले दिन 3 से 4 बजे Test करने की अनुमति मिल गई रामलाल जी को। 3 जून, 2020 को दोपहर 2 बजे बोरघरे परिवार (रामलाल जी, पत्नी सरिता जी,पुत्र आकाश और उनका एक मित्र मनीष) MGS अस्पताल पहुंचे। अस्पताल पहुँच कर आकाश द्वारा Test Fees (4500₹) जमा कराए गए। सही समय पर अस्पताल पहुचने के बावजूद 2 घण्टे बीत जाने के बाद भी रामलाल जी को अस्पताल के अंदर आने नहीं दिया गया। आकाश को 4.30 बजे lab के पास बुलाकर Test के लिए जमा पैसा (4500₹) वापस देकर कहीं और Test करवाने को भी कहा गया और यह भी कहा गया की test करने से Delhi Governmemt ने मना कर दिया है। रामलाल जी अपनी पत्नी के साथ गाड़ी में अस्पताल में प्रवेश के लिए इंतज़ार कर रहे थे। पुत्र आकाश के द्वारा बहुत विनती करने के बाद भी उन्हें प्रवेश न मिला। रामलाल जी की हालत गंभीर होने लगी वह पत्नी के साथ गाड़ी में प्रवेश का इंतजार करते हुए बेहोश हो गए। करीबन 5 बजे उन्हें बेहोशी की हालत में ही कार से निकालकर हॉस्पिटल में Wheelchair से Emergency Bed पर लेटाया गया। बहुत हालात खराब होने के बाद Emergency में Admit करने से पहले आकाश ने 14000₹ भी जमा कराए। Emergency Room में ले जाते समय रामलाल जी कुछ बोलने की कोशिश कर रहे थे और सांस भी नहीं ले पा रहे थे। कुछ समय तक डॉक्टर ने शरीर को हाथ तक नहीं लगाया।थोड़ी देर बाद उन्हें CCU (Coronary Care Unit) ले जाया गया, जहां उन्हें कुछ समय बाद मृतक घोषित कर दिया गया। परिवार का कहना है कि डॉ संजय शर्मा ने उन्हें मानसिक रूप से प्रताणित किया और डॉक्टर ने यह भी कहा कि परिवार की वजह से रामलाल जी की जान गई है। डॉक्टर ने ये भी कहा कि परिवार ने मृतक को 2 जून को Emergency में क्यों नहीं दाखिल कराया। डॉक्टर ने उसी दिन अस्पताल के पर्चे पर 2 जून, 2020 की तारीख डालकर Emergency admit लिख दिया और उसके द्वारा की गई फेर बदल आकाश ने पकड़ ली, क्योंकि वह पर्ची की पहले ही फ़ोटो ले चुका था, जिसमें ऐसा कुछ नही लिखा गया था। डॉक्टर और अस्पताल प्रशासन ने OPD के कागज से फेर बदल की और मृतक की जांच के लिए शरीर को अगले दिन 4 जून, 2020 को संजय गांधी हॉस्पिटल भेजा गया। उसी दौरान Covid19 Pandamic की Guidelines के अनुसार किसी भी मृत शरीर का covid टेस्ट नहीं होगा ऐसा नियम आया। परिवार को अस्पताल द्वारा झूठे कारण बताए गए। 8 जून, 2020 को Health& Family Welfare Department द्वारा Lady Harding के HOD को पत्र लिखकर जल्दी फैसला लेने का आदेश दिया। परंतु आज 9 जून, 2020 है और परिवार को मृतक का शरीर अभी तक नही दिया गया और ना ही कुछ भी बताया जा रहा कि मृत्यु का सही कारण क्या रहा? उन्हें अब बताया यह गया है कि मृतक का Covid Test होगा। आज 7 दिन बीत गए प्रशासन को आश्वासन देते हुए मगर कोई ठोस कदम नहीं लिया जा रहा। रामलाल जी का शरीर किस अवस्था में होगा अब और देरी करने से शरीर के पास जाना भी नुकसानदायक होता जा रहा है। परिवार की हालत समय के साथ खराब होती जा रही है। परिवार पूरी तरह से उन्हीं पर निर्भर था। परिवार को कभी यह उम्मीद न थी कि दिल्ली पुलिस के इस कर्मचारी का अंत इस तरह से होगा। सरकारी कर्मचारी के साथ यह सब होते देख कर इंसानियत शर्मसार हो गई है। रामलाल जी को मृत्यु से पहले भी अलग-अलग जगह भटकाया जा रहा था और अब उनके शरीर को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाया जा रहा है। अस्पताल की लापरवाही, मानसिक प्रताणना और उपचार में देरी, समय पर बुलाने पर भी Covid19 Test करने में देरी के कारण हुई मौत से शायद ही कभी परिवार वाले उभर पाएं। मृतक का शरीर मिलना परिवार का हक़ है। परिवार को सरकार से इंसाफ की आशा है।
कुणाल बोरघरे (7982005221)
आकाश बोरघरे (8826429901)

  • स्रोत

SavdhanPoliceManchParHai ग्रुप से लिया गया पोस्ट

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