थाली- लोटा और कटोरा बजाने के बाद राजद अब बिहार प्रदेश में पिटवाएगी ढ़ोल

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR ✍️

PATNA पटना : बिहार सरकार कि विपक्षी पार्टी राजद ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगाया है कि कोरोना वायरस के कारण पैदा मानवीय संकट के दौरान भी वह चुनाव के जातीय अंकगणित की चिंता में लगे हैं। इसके साथ ही पार्टी ने कहा कि पीडितों की सुध लेने के वास्ते उन्हें ”नींद” से जगाने के लिए पार्टी पूरे प्रदेश में ढोल पिटवाएगी।

बिहार विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने प्रदेश में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बावजूद सबसे कम जाँच होने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि इस गंभीर मानवीय संकट और आपदा काल में भी नीतीश कुमार 90 दिन से अपने आवास से बाहर नहीं निकले हैं।

तेजस्वी ने बिहार सरकार पर आरोप लगाया कि नीतीश सरकार को जनता नहीं चुनाव कि चिंता हैं। तथा विधानसभा चुनाव: के जातीय अंकगणित की चिंता है।

तेजस्वी सोमवार को पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे।उन्होंने सवाल किया, ”क्या यह सच नहीं है कि बिहार में कोरोना वायरस जाँच की गति देश में सबसे कम है? विगत 100 दिनों में लगभग 12 करोड़ 60 लाख की आबादी वाले प्रदेश में अब तक मात्र एक लाख 23 हज़ार ही जाँच हुई है। धीमी जाँच का दोषी कौन है? क्या तीन महीने बाद भी चिकित्सकीय आधारभूत संरचना इतनी दयनीय है कि एक दिन में 10 हज़ार जाँच ही हो सके”। उन्होंने कहा, ”बिहार सरकार ने घर घर सर्वेक्षण कराने तथा 10 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग का दावा किया था…


ऐसा क्यों नहीं हुआ?” तेजस्वी ने कहा ”सरकार दावा करती है कि अधिकतर संक्रमित मरीज बाहर से लौटे श्रमिक हैं अथवा उनके संपर्क में आए व्यक्ति हैं। प्रश्न यह है कि क्या बिहार वापस लौटे 30-32 लाख श्रमिक भाइयों की जाँच हुई?” उन्होंने सत्तापक्ष पर कोरोना वायरस प्रबंधन को भूल चुनावी प्रबंधन में व्यस्त होने का आरोप लगाया और सवाल किया कि क्या मुख्यमंत्री को पटना शहर में ही स्थित पटना मेडिकल कालेज अस्पताल और नालंदा मेडिकल कालेज अस्पताल में जाकर वहां की तैयारियों का जायज़ा नहीं लेना चाहिए? तेजस्वी ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री बाहर निकल कर पीडित प्रवासी श्रमिकों का हाल-चाल नहीं पूछेंगे तो उन्हें ”नींद” से जगाने के लिए राजद पूरे बिहार में ढोल पिटवाएगी। उल्लेखनीय है कि सात जून को भाजपा की डिजिटल रैली के दिन विरोधस्वरूप राजद के नेताओं एवं कार्यकर्ताओं ने अपने-अपने घरों के बाहर थाली-कटोरा बजाया था। वामदलों ने उक्त दिन को विश्वासघात व धिक्कार दिवस के रूप में मनाया था ।

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