डांग पूर्णा अभयारण्य में चौसिंगा हिरणों की एक दुर्लभ प्रजाति वन विभाग के कैमरे में कैद

– मनीष पालवा

डांग जिला विभिन्न प्रकार के जैविक वनस्पतियों, कई जीवों, पक्षियों और शाकाहारी, मांसाहारी जानवरों के वन्य जीव खजाने के रूप में जाना जाने वाला पूर्णा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी अब प्रकृति प्रेमियों के लिए अच्छी खबर मिली है। कोरोना महामारी में लॉकडाउन की स्थिति में लोगों के शोर और वातावरण में बदलाव के कारण लुप्त हो चुकी प्रजाति चोसिंगा हिरन को वन विभाग ने कैमरे में कैद किया है। सामान्यतः डांग, महिसागर के जंगलों में पाए जाने वाले यह चोसिंगा प्रजाति के हिरन, पूर्णा अभयारण्य क्षेत्रों में विलुप्त होने के कगार पर थे की पूर्णा अभ्यारण मैं यह प्रजाति के हिरण के जीवित रहने की पुष्टि उत्तर डांग वन विभाग के ACF अग्नेश्वर व्यास ने की थी।

उन्होंने कहा कि चौसिंगा, जो आम तौर पर 12 से 15 साल की आयु तक जीवित रहने वाले विशेष रूप से शांत और मैदानी क्षेत्रों में पाया जाता है।  उत्तर वन विभाग के रेंज क्षेत्र में वन के बढ़ते घनत्व के साथ, शाकाहारी जानवरों के लिए पर्याप्त भोजन और आश्रय की व्यवस्था के साथ, वन विभाग के अधिकारियों को उनकी सुरक्षा के लिए दिन-रात तैनात किए जाने के कारण लुप्त होती प्रजातियो अस्तित्व में आ रही है।  वर्तमान में, अभयारण्य क्षेत्रों में, शाकाहारी प्राणी जैसे कि चित्तीदार हिरन के जोड़े लाकर प्रजनन केंद्र बनाकर जानवरों की संख्या बढ़ाने का काम किया गया है।

इस संदर्भ में पूर्णा अभ्यारण के इलाके में रहने वाले राजेशभाई गामित, जो  सुबीर तालुका पंचायत के पूर्व अध्यक्ष हैं, उन्होंने कहा कि पूर्णा वन्यजीव अभयारण्य में कई जानवरों और वन्य जीवन के साथ-साथ ऊंचे गगन चुंबी पेड़ों का खजाना है।  पूर्णा अभयारण्य में वन्यजीवों की बढ़ती संख्या और जंगल के बढ़ते घनत्व के लिए उप वन संरक्षक अग्नेश्वर व्यास को श्रेय दिया जाता है।  वे लगातार अपने  कर्मचारियों के  साथ स्वयं जंगल में वन क्षेत्र में ट्रेकिंग करते हैं, पेट्रोलिंग के कारण पेड़ों की कटाई के साथ शिकार गतिविधियों पर अंकुश लगाया हैं। यदि वर्तमान पूर्णा अभयारण्य में चोसिंगा प्रजाति का पोषण होता है और पर्यटकों की संख्या बढ़ती है, तो कई लोगों के घर में रोजगार के अवसर होंगे।

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