बिहार में RJD को एक ही दिन में दो बड़े झटके, पांच MLC के पार्टी छोड़ने के बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने भी दिया इस्तीफा !

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR✍️

बिहार : राष्ट्रीय जनता दल को आज एक दिन में दो बड़े-बड़े झटके खाने पड़े। आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजद को एक ही दिन में दो बड़े झटके लगे हैं। पांच एमएलसी के पाला बदलने के कुछ ही देर बाद राजद के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रघुवंश प्रसाद सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। बताया जा रहा है कि वह रामा सिंह को राजद में शामिल किए जाने को लेकर नाराज हैं।
फिलहाल रघुवंश प्रसाद पटना एम्स में भर्ती हैं वह, कोरोना से संक्रमित हैं।


इससे पहले, आज ही राजद के पांच विधान पार्षद  दिलीप राय, राधा चरण सेठ, संजय प्रसाद ,कमरे आलम और रणविजय सिंह जेडीयू में शामिल हो गए हैं। जदयू की सचेतक रीना यादव के पत्र के आलोक में विधान परिषद ने राजद से आए जदयू के सभी सदस्यों को मान्यता दे दी।
किसी जमाने में लालू के कट्टर विरोधी रहे हैं रामा सिंह

जानकारी के मुताबिक दो दिन पहले ही रामा सिंह ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी और उसके बाद ही उनके राजद ज्वाइन करने की चर्चा है। रामा सिंह के साथ ही सवर्ण समाज से कई अन्य नेता भी राजद में शामिल होने वाले हैं। बता दें कि किसी जमाने में रामा सिंह लालू यादव और रघुवंश प्रसाद सिंह के कट्टर विरोधी रहे हैं।

वहीं, राजद में विप उम्मीदवारों के नाम की चर्चा होते ही विवाद शुरू हो गया है। पार्टी नेता पूर्व मंत्री भोला राय के समर्थकों ने सोमवार को राबड़ी देवी के आवास 10 सर्कुलर रोड पर जाकर हंगामा किया। उधर, जानकारी के अनुसार लालू प्रसाद के बड़े बेटे तेजप्रताप भी दिल्ली में अपना कागज तैयार करने में लगे हैं। तेजप्रताप इस बार विधान परिषद के उम्मीदवार बनने के प्रयास में हैं, लेकिन पार्टी ने विधानसभा चुनाव को देखते हुए परिवार के किसी सदस्य को सदन में नहीं भेजने का फैसला किया है।
बिहार विधान परिषद की नौ सीटों के लिए जदयू, भाजपा, राजद और कांग्रेस में उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है। जदयू ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को इसके लिए अधिकृत कर दिया है। राजद में तीन सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम लगभग तय हो गए हैं। वहीं प्रदेश भाजपा ने संभावित उम्मीदवारों की सूची केंद्र को भेज दी है। उधर, कांग्रेस में अनेक दावेदारों के बीच एक उम्मीदवार का चयन पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती है.

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