बिहार सरकार के पूर्व मंत्री पूर्णमासी राम ने नीतीश सरकार पर धावा बोलते हुए, कमियों की गिनती लगाई।

फोटो : बिहार के पूर्व मंत्री पूर्णमासी राम

पटना में इलाज की व्यवस्था अलग-थलग, कोरोना का टेस्ट ना करके इस बीमारी से बचा नहीं जा सकता !

नीतीश सरकार बताएं, आम लोग आखिर किसके भरोसे ?

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR✍️अनिल कुमार सोनी / प्रभारी बिहार

बगहा : (पश्चमी चम्पारण) बिहार प्रदेश के पूर्व कैबनेट मंत्री , गोपालगंज के पूर्व सांसद व जन संघर्ष दल के राष्ट्रीय प्रधान महा सचिव पूर्णमासी राम ने नीतीश सरकार पर लगातार धावा बोलते हुए इलाज व्यवस्था पर सवाल खड़े किये।
उन्होंने कहा कि एक तरफ पूरे बिहार में बेहताशा वृद्धि होती जा रही कोरोना संक्रमण से बिहार की स्थिति चिंतनीय और पूर्ण रूप से विचारनीय होती जा रही है जब कि वही राजधानी पटना के अंदर हॉस्पिटलों में अलग – अलग तरह की इलाज व्यवस्था की गई है। क्या ये जनता के साथ न्याय है या अन्याय ।
सच कहे तो काफी निंदनीय है।
ये केवल पटना तक ही सीमित नही पूरे बिहार की दुर्दशा को दर्शाती हुई अलग-अलग जगहों से अलग – अलग तस्वीरे देखने और परिस्थिति सुनने को निरंतर मिलती ही रह रही है।

नीतीश सरकार पूरे बिहारवासियों को ये बताये कि आखिर इस पूरे बिहार की जनता किसके भरोसे है। राम भरोसे या नीतीश भरोसे।
बिहार की भोली भाली जनता को बरगलाकर कर राज करने का समय अब समाप्त हो चुका है। जनता अपने मत के अधिकार को भली भाती समझ चुकी है। अब उन्हें नीतीश सरकार बरगला नही सकती।
यहां तक कि सभी को पता है कि लंबे समय से सूबे के मुखिया व बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार केवल वादों के सिवा कुछ नही दिए। जिनके झूठे प्रलोभन में आजतक पूरे चम्पारण की जनता के सामने सभी वायदे झुठे साबित हुए है।

अब अगर पूरे बिहार की बाते करे तो पूरे बिहारवासियों को सुरक्षित लेकर चलना नीतीश सरकार के बूते की बात नही रही ।
आज पूरा देश कोरोना महामारी जैसे इस विकट परिस्थिति की मार झेल रही है वही इनको केवल चुनाव की चिंता पड़ी है। ऐसे परिस्थितियों में चुनाव के जगह राष्ट्रपति शासन लगनी चाहिए।

श्री राम ने कहा कि बिहार की हर दशा और दिशा से हम पूर्व से भलीभांति अवगत है। यहाँ कोई चाहकर भी नही बरगला सकता ,कोरोना महामारी में बिहार के भोले भाले जनता जनार्धन के साथ जो राजनीति खेल खेली जा रही है वो किसी भी दृष्टिकोण से जायज नही है। हम सदैव सही के साथ थे ,हैं और रहेंगे।

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