डांग जिले की पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली से ग्रामीणों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशासन का सराहनीय प्रयास

– मनीष पालवा

एस.के.नंदा ने आहवा सेवा सदन में वैद्यराज के साथ किया संवाद

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सलाहकार सुदीप कुमार ने डांग जिले के घने वन क्षेत्र में अनुपलब्ध वन जड़ी-बूटियों के उचित संरक्षण और संवर्धन के माध्यम से “सर्वजन हिताय, सर्व जन सुखाय” के लिए सदियों पुरानी पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली के उपयोग की हिमायत की।

एस.के.नंदा, ने हाल ही में डांग जिले का दौरा किया था, जिन्होंने जिला सेवा सदन में डांग जिले के वैद्यराजो भगतों से सीधा संवाद किया। उन्होंने कहा कि वन जड़ी बूटियाँ, और आयुर्वेदिक चिकित्सा के द्वारा ग्रामीणों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशासनिक प्रयास में वैद्यराज के सहयोग की आवश्यकता है।  लाल चावल, रोईचा घास, नागली, सफेद मुसली जैसे विशिष्ट वनिल उत्पादक से आर्थिकी उपार्जन करके भगत परिवार स्वयं भी प्रगति करके सार्वजनिक सेवा कार्य कर सकते हैं।

इस बीच, डांग कलेक्टर एन.के.डामोर ने वैद्यराज के एक समूह का गठन किया और अपने स्वयं के विकास के लिए एक परियोजना में सहयोग बनकर “आत्मनिर्भर” बनने की ओर बढ़ने का आग्रह किया।  वन विकास निगम सहित आदिवासी विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं की मदद से पारंपरिक चिकित्सा और ज्ञान का अच्छा उपयोग करके समाज के जरूरतमंद रोगियों की सेवा करने की अपील करते हुए, कलेक्टर ने भगत परिवार की नई पीढ़ी से इस दवा का ज्ञान प्राप्त करे और रोजगारी का स्थायी प्रबंधन सहयोगी प्रयासों से हो ऐसा कहा ।  दक्षिण डांग वन विभाग के उप वन संरक्षक दिनेश रबारी ने कहा कि डांग वन विभाग द्वारा बोटानिकल गार्डन – वघई और नवताड़ में वन हर्बल नर्सरी में विभिन्न वन जड़ी बूटियों के बीज नि: शुल्क उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि वन विभाग वन और वन जड़ी बूटियों के संरक्षण और संवर्धन के कार्य में सहयोगी बने रहेंगे। इस बीच, डांग के वैद्यराज की ओर से सयाजू ठाकरे, मंगुभाई आदि ने उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा में भाग लिया।  जिला विकास अधिकारी एच.के.वढवानिया निवासी अधिक कलेक्टर टी.के.डामोर ने भी उपयोगी मार्गदर्शन दिया।

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