एक ही नदी के है यह दो किनारे दोस्तो ! दोस्ताना जिन्दगी से,मौत से यारी रखो :- राहत इंदौरी

शब्दों के अटूट सागर में गोते लगाकर जौहरी की तरह परख रखने वाले पारखी का निधन।

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR
अनिल कुमार सोनी / प्रभारी बिहार

डाॅ. राहत इंदौरी के निधन के खबर के बाद पर्यावरण प्रेमी गजेंद्र यादव ने दुःख प्रकट करते हुए कहाँ की आज साहित्य, शायर, कवि, गीतकार के निधन से एक युग का अंत हो गया है।

अपने अनोखे अंदाज में भारतवर्ष को प्रस्तुत करने का इंदौरी साहब का जो अंदाज रहा वो अब यतीत के पन्नो में हमेशा-हमेशा के लिए बन्द हो गया। लेकिन जो उनकी काबिलियत औऱ विशेषताएँ थी वो सदैव अमर रहेंगी।
एक कार्यक्रम के दौरान बगहा आये राहत इंदौरी साहब ने जो स्नेह ,साथ ,और प्यार बगहा के लिए दिया उसे कभी भी भुलाया नही जा सकता।
भारतवर्ष के लिए समर्पित काब्य समेलन में भी उनकी देश प्रेम प्रस्तुति से पूरा माहौल तालियों के गड़गड़ाहट से गूंज उठता था। जिसको आज खो कर पूरा देश शोकाकुल है, जिनकी कमियां सदैव खेलेंगी।

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