मशहूर शायर राहत इंदौरी के निधन से उनके प्रशंसकों में शोक की लहर, नम आँखों से कहा अलविदा..

अब ना मैं हूँ ना बाक़ी हैं ज़माने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे :- राहत इन्दौरी

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR

देश के मशहूर शायर राहत इंदौरी साहब का मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उनके निधन की खबर से देश विदेश के उनके प्रशंसकों चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई।


उनके जाँच में कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आई थी।
उन्होंने अपने बेहतरीन शायरी से एक अलग मुकाम हासिल किया तथा देश विदेश में रह रहें लोगों को अपना प्रशंसक बनाया था।

वहीं शिक्षक सुनिल कुमार ‘राउत’ ने उनके निधन पर गहरा शोक प्रकट करते हुए उनके साथ बीते दिनों को याद कर कहा कि एक कार्यक्रम के तहत जब राहत इंदौरी साहब बगहा के डी एम एकेडमी में आए थे तब कुछ अनमोल समय उनके साथ बिताए थे। वे मिलनसार स्वभाव के साथ ही बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उनसे मिलना सुखद अनुभव रहा। जाते वक्त उन्होंने आशीर्वाद दिया था। वो पल आजीवन याद रहेगा।

इन्दौरी साहब के शायरी ‘अब ना मैं हूँ ना बाक़ी हैं ज़माने मेरे, फिर भी मशहूर हैं शहरों में फ़साने मेरे..’ को याद करते हुए आगे कहा कि भले ही आज वे इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनकी कीर्ति सदैव जीवंत रहेगी। उनकी शायरी दिल को छू जाती है। उनके जाने के साथ उर्दू साहित्य के एक युग का अंत हो गया।

देश पर उनकी शायरी :-

हम अपनी जान के दुश्मन को, अपनी जान कहते हैं।
मोहब्बत की इसी मिट्टी को, हिंदुस्तान कहते हैं॥

दुश्मनी दिल की पुरानी चल रही है जान से, ईमान से।
लड़ते लड़ते जि़न्दगी गुजरी है बेईमान से, ईमान से।
ऐ वतन! इक रोज तेरी ख़ाक में खो जाएंगे, सो जाएंगे।
मरके भी रिश्ता नहीं टूटेगा हिंदुस्तान से, ईमान से।

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