बगहा शुगर्स मिल मालिक व भाजपा नेता द्वारा जरूरतमंद परिवार को खाध राहत सामग्री वितरण के सौ दिन पूरे !

आगे भी निरतंर जरूरतमंद परिवारों को मिलता रहेगा सहयोग :- दीपक यादव

अनिल कुमार सोनी / प्रभारी बिहार

बगहा :- सर्व प्रथम दीपक यादव का एक उद्देश्य और संकल्प के साथ सामाजिक -कार्य (social work) में निरंतर लगे हुए है ! जिसका आज सौ दिन पूरा हुआ।

दीपक यादव का संकल्प :- कोई परिवार भूखा न सोये के तहत इस सहयोग कार्यों में बिशेष पहल किया गया, जिसके सौ दिन पूरे हुए।
भाजपा नेता दीपक यादव ने इन सौ दिन में जो कर दिखाया है उतना इनके पूर्व कोई भी समाजसेवी , राजनेता लोग भी नही कर पाए। जो यथार्त है।

कोरोना काल के शुरुआती दौर से ही पूरे चम्पारण में जरूरत मन्द परिवार की सूची तैयार कर जो राहत सहयोग कार्य दीपक यादव द्वारा की जा रही है , सच में काबिले तारीफ हैं।

दीपक यादव द्वारा हर नगर – नगर से गाँव-गाँव तक जो जनसंपर्क अभियान चला उसका सीधा असर अब दिखने लगा है।

विकास की बहती धारा में अभी क्षेत्रो में बहुत सारी कमिया है। जिसे गिनती कराना उचित नही समझते। आज के दौर में लोग खुद समय के साथ उस व्यवस्था की कमी देखते हुए माँग उठा रहे है जो अब तक पूरा नही हो सका है।


समाजसेवा एक शैक्षिक एवं व्यावसायिक विधा है जो सामुदायिक सगठन एवं अन्य विधियों द्वारा लोगों एवं समूहों के जीवन-स्तर को उन्नत बनाने का प्रयत्न करता है। सामाजिक कार्य का अर्थ है सकारात्मक, और सक्रिय हस्तक्षेप के माध्यम से लोगों और उनके सामाजिक माहौल के बीच अन्तःक्रिया प्रोत्साहित करके व्यक्तियों की क्षमताओं को बेहतर करना ताकि वे अपनी ज़िंदगी की ज़रूरतें पूरी करते हुए अपनी तकलीफ़ों को कम कर सकें। इस प्रक्रिया में समाजिक -कार्य जो लोगों की आकांक्षाओं की पूर्ति करने और उन्हें अपने ही मूल्यों की कसौटी पर खरे उतरने में सहायक होता है।


‘समाजसेवा’वैयक्तिक आधार पर, समूह अथवा समुदाय में व्यक्तियों की सहायता करने की एक प्रक्रिया है, जिससे व्यक्ति अपनी सहायता स्वयं कर सके। इसके माध्यम से सेवार्थी वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों में उत्पन्न अपनी समस्याओं को स्वयं सुलझाने में सक्षम होता है। समाजसेवा अन्य सभी व्यवसायों से सर्वथा भिन्न होती है, क्योंकि समाज सेवा उन सभी सामाजिक, आर्थिक एवं मनोवैज्ञानिक कारकों का निरूपण कर उसके परिप्रेक्ष्य में क्रियान्वित होती है, जो व्यक्ति एवं उसके पर्यावरण-परिवार, समुदाय तथा समाज को प्रभावित करते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता पर्यावरण की सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक शक्तियों के बाद व्यक्तिगत जैविकीय, भावात्मक तथा मनोवैज्ञानिक तत्वों को गतिशील अंत:क्रिया को दृष्टिगत कर ही सेवार्थी की सेवा प्रदान करता है। वह सेवार्थी के जीवन के प्रत्येक पहलू तथा उसके पर्यावरण में क्रियाशील, प्रत्येक सामाजिक स्थिति से अवगत रहता है क्योंकि सेवा प्रदान करने की योजना बताते समय वह इनकी उपेक्षा नहीं कर सकता।
समाज-कार्य का अधिकांश ज्ञान समाजशास्त्रीय सिद्धांतों से लिया गया है, लेकिन समाजशास्त्र जहाँ मानव-समाज और मानव-संबंधों के सैद्धांतिक पक्ष का अध्ययन करता है, वहीं समाज-कार्य इन संबंधों में आने वाले अंतरों एवं सामाजिक परिवर्तन के कारणों की खोज क्षेत्रीय स्तर पर करने के साथ-साथ व्यक्ति के मनोसामाजिक पक्ष का भी अध्ययन करता है। समाज-कार्य करने वाले कर्त्ता का आचरण विद्वान की तरह न होकर समस्याओं में हस्तक्षेप के ज़रिये व्यक्तियों, परिवारों, छोटे समूहों या समुदायों के साथ संबंध स्थापित करने की तरफ़ उन्मुख होता है। इसके लिए समाज-कार्य का अनुशासन पूर्ण रूप से प्रशिक्षित और पेशेवर कार्यकर्ताओं पर भरोसा करता है।

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