“जल जीवन हरियाली” का राज खोलता मटियरिया पोखर ! पर्यावरण प्रेमी गजेंद्र यादव ने स्थल पर पहुंचकर पोखरे की दुर्दशा पर दुःख प्रकट किया।

जिसके अधिकांश भूमि को लोगो ने किया अतिक्रमण :- पर्यावरण प्रेमी गजेंद्र यादव

अनिल कुमार सोनी / प्रभारी बिहार

बगहा-2 प्रखंड ग्राम-मटियरीया पंचायत-चमवलिया का तीस एकड़ जमीन में फैला ये पोखर, जिसके अधिकांश भूमि को लोगो ने किया अतिक्रमण।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने “जल जीवन हरियाली” अभियान की शुरुआत पश्चिम चम्पारण के गांव चंपापुर से की थी , जब कि उन्होंने वहां के तालाब और नदी का निरीक्षण भी किया था। नीतीश कुमार अपनी हर यात्रा के तहत चंपारण से ही इस कार्यक्रम की शुरूआत की थी।

सूबे मुखिया नीतीश कुमार द्वारा हर कार्यक्रम का शुरुआत तो सही तरीकों से होता रहा है लेकिन उस पर पहल होना एक पहेली की तरह रह जाता है।

चम्पारण से शुरूआत करने के बाद पूरे राज्य का दौरा करने उपरांत “जल जीवन हरियाली” इस विस्तृत कार्यक्रम को जारी किया था।
इस अभियान के पीछे नीतीश कुमार ने तर्क भी दिया था कि इस वर्ष जो असमय राज्य के 280 प्रखंड सूखे से प्रभावित हुए और भू-जलस्तर अधिकांश ज़िलों में काफ़ी नीचे चला गया। अब इस बात में कोई संदेह नहीं रहा कि अगर पर्यावरण के संतुलन के बारे में तत्काल कोई क़दम नहीं उठाया गया तो आने वाले दिनों में पूरे राज्य में भयंकर जल संकट से लोगों को रूबरू होना पड़ सकता है। इस अभियान पर क़रीब कई हज़ार करोड़ रुपये ख़र्च होने के बाद भी तालाबों के इस दुर्दशा को देखकर हौरानी हो रही है।

वही “जल जीवन हरियाली” कार्यक्रम के अंतर्गत कई करोड़ पेड़-पौधों का रोपण पर भी कागजी योजनाएं बनी।
जो धरातल पर आकर सिमट कर रह गई।
पानी के परंपरागत स्रोत जैसे तालाब, पोखर, कुओं का जीर्णोद्धार तो किया गया लेकिन उसके विधि व्यवस्था में चूक करने में कोई कोर कसर बाकी भी नही रहा।
क़रीब 10 हज़ार जल स्रोतों पर कच्चा अतिक्रमण है। नीतीश कुमार का मानना है कि जैसे उनके हर घर बिजली और हर घर नल का जल योजना को केंद्र और अन्य राज्य सरकारों ने अपनाया वैसे ही देर सबेर इस योजना को भी केंद्र और राज्य सरकारें अपनाएंगी। इस योजना के हर कार्यक्रम में सभी दलों के विधायक और नेताओं को आमंत्रित कर समीक्षा बैठक में उनकी राय जानने का प्रावधान भी है।

राज्य सरकार के सम्बंधित अधिकारियों का कहना है कि बिहार के सामने आज जलवायु परिवर्तन तथा हवा-पानी तक को जहरीला बनाने वाले प्रदूषण से निपटना सबसे बड़ी चुनौती है, इसलिए राज्य सरकार ने कारगर तरीके से इसका मुकाबला करने का बड़ा फैसला किया। जल-जीवन-हरियाली योजना तेजी से लागू की जा रही है. तीन साल में 7.5 करोड़ पौधे लगाकर ग्रीन कवर 17 फीसद तक करने पर काम चल रहा है.

बिहार सरकार के जल जीवन हरियाली द्वारा बिहार के सभी तलाब पोखर का जल संरक्षण हेतु सभी तलाबो को अतिक्रमण मुक्त कर जीर्णोद्धार करना है।

वही इन बिंदु पर सरकार का ध्यान उत्कृष्ट करने हेतु पर्यावरण प्रेमी ने माटियरिया पोखर के उन सभी कमियों को गिनाते हुए उसके कायाकल्प की गुहार लगाई….

*माटियरिया के ग्रामीण छठ पूजा अर्ध वहीं करते हैं। यह तलाब नौका विहार एवं पर्यटक स्थल हो सकता है। तलाब अपने जीर्णोद्धार के लिए तरस रहा हैं।

*तलाब का किनारा जुवारी और शराबियों का अड्डा बना हुआ है।

*पर्यटको के आने से वाहा के बेरोजगारो को रोजगार भी मिल सकेगा !

*मछली पालन से हर साल लाखों रुपयों का व्यवसाय भी हो सकता है।

*तलाब के चारों तरफ पौधारोपण से हरियाली के साथ,सरकार का मिशन आत्मनिर्भर , स्वरोजगार का एक अहम जरिया भी हो सकता है।

*वही पोखर पर बने मंदिर परिसर के किनारे एकांत पा कर शराबियों द्वारा प्रत्येक दिन माँस के साथ शराब पीते शराबियों से परेशान मंदिर पुजारी।

ANIL KUMAR SONI / COORDINATOR BIHAR अनिल कुमार सोनी / प्रभारी बिहार✍️
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