हिन्दी दिवस पर शिक्षक सुनील राउत के दो शब्द,हिन्दी हमारी अस्मिता, गौरव तथा देश की पहचान।

अनिल कुमार सोनी / प्रभारी बिहार

आज 14 सितम्बर – हिन्दी दिवस पर कुछ बिशेष:-
हिन्दी ना सिर्फ हमारी राष्ट्र भाषा है बल्कि हर नागरिक से जुड़ा हमारी अस्मिता और गौरव का प्रतीक है। हिन्दी प्रेम की भाषा है तथा सीखने एवं बोलचाल व्यवहार में सरल, सहज व शालीन है। इससे हमारी संस्कृति, आचरण दृष्टिगत होती है।
हम प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाते हैं। इसका उद्देश्य हिन्दी का व्यापक प्रचार प्रसार करना है ताकि हिन्दी को विश्व स्तर पर बढ़ावा मिले तथा सभी देश हिन्दी से प्रभावित हों।

आज विश्व के कई गैर हिन्दी भाषी देश के लोग भी हिन्दी सीख रहें हैं तथा उसका प्रयोग भी कर रहे हैं।
उक्त बातें उo मध्य विद्यालय, पचरुखा में हिन्दी के शिक्षक सुनिल कुमार ने कहा तथा आगे बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिंदी ही भारत की राजभाषा होगी। संविधान सभा ने हिन्दी को राष्ट्र की आधिकारिक भाषा के तौर पर स्वीकार किया था और पहला हिंदी दिवस 14 सितंबर 1953 में मनाया गया था। तब से हर वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस मनाया जाता है।
शिक्षक ने यह भी कहा कि देश की राष्ट्रीय भाषा हिन्दी होने के बावजूद राज्यों में भाषायी मतभेद, असमानता दुःखद, निराशाजनक, चिंतनीय एवं गंभीर समस्या है। हम सभी देशवासियों को मिलकर इस खाई को बांटना होगा तभी सही मायने में आपसी सद्भाव, देश की एकता, अखंडता एवं संप्रभुता कायम रह सकेगी। हिन्दी विचारों की सेतु है। देश की प्रगति हिन्दी की प्रगति से ही संभव है। सुप्रसिद्ध कवयित्री महादेवी वर्मा ने कहा था – ”अपने भाषा के साथ-साथ अन्य भाषा जान लेना गर्व की बात है, पर अपने जैसा सम्मान देना अपमान की बात है।” आज के दौर में लोगों का रहन-सहन, बोल-चाल,स्वभाव एवं व्यवहार में परिवर्तन देखने को मिलता है। अंग्रेजी बोलना अब फैशन व स्टेटस की बात मानी जाने लगी है जो हमारे मानसिक, बौद्धिक, सांस्कृतिक पिछड़ेपन का कारण है। आज अपने ही देश में हिन्दी पखवाड़ा मनाया जाना हम देशवासियों के लिए चिंता की बात है। देश का नागरिक होने के नाते हम सभी देशवासियों का यह कर्तव्य है कि राष्ट्रभाषा हिन्दी को महत्व एवं बढ़ावा दें।

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