आहवा सिविल अस्पताल में रखा गया “अनाम पालना” :मानवीय संवेदनाओं को उजागर करने की एक पहल

अवांछित नवजात शिशुओं को खाली जगह न छोड़कर ‘अनाम पालने’ में रखने की संवेदनशील अपील

– मनीष पालवा

गुजरात,आहवा-डांग:
समाज में, जब नवजात संतानों को कभी-कभी अपने ही लोगों द्वारा परित्यक्त स्थान पर, या बदबूदार ढेर पर छोड़ दिया जाता है, तब शरीर में एक कंपकंपी फैल जाती है। मन और मस्तिष्क की नसें भी कई बार कमजोर हो जाती हैं।

वह माँ जो अपने बच्चे को नौ महीने तक अपने गर्भ में पालती है, क्या उसे अपने बच्चे को जन्म देने के बाद क्यू छोड़ना पड़ता है ? कारण जो भी हो, ऐसी घटनाओं को जो समाज के लिए एक अपमान समझा जा सकता है भविष्य में नहीं हो, और असहाय या क्रूरता के कारण ऐसे परित्यक्त नवजात शिशुओं के बहुमूल्य जीवन को बचाने के लिए मानवीय दृष्टिकोण वाली संवेदनशील राज्य सरकार ने “अनाम पालना” रखने का एक अभियान शुरू किया है।

इसी के तहत, डांग जिले के मुख्यालय आहवा में सिविल अस्पताल में एक समान ‘अनाम पालना’ स्थापित किया गया है। ऐसे मजबूर, असहाय या अवांछित बच्चे के माता, पिता या अभिभावक को अपने बच्चे को एक परित्यक्त स्थान पर या बदबूदार ढेर पर नहीं छोड़कर यहाँ उपलब्ध छत्रछाया के नीचे छोड़ने का अवसर मिलेगा। ताकि एक अवांछित नवजात शिशु को एक देखभाल करने वाले को सौंपकर नवजीवन दिया जा सके।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री चिराग जोशी ने कहा कि संवेदनशील राज्य सरकार की जिला बाल संरक्षण इकाई द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत, परित्यक्त नवजात शिशुओं को जो किशोर न्याय अधिनियम -2015 के तहत गोद लेने की प्रक्रिया के अनुसार, इसका पुनर्वास किया जाएगा और इसके पालनहार बनने के लिए तैयार माति-पिता, अभिभावकों को सौंप दिया जाएगा। ऐसा जिला बाल संरक्षण अधिकारी श्री चिराग जोशी ने पूरक विवरण देते हुए कहा।

आहवा सिविल अस्पताल में ‘बेनामी पालना’ रखने के इस संवेदनशील कार्यक्रम मेंअधीक्षक डॉ. रश्मिकांत कोकनी, आर.एम.ओ.  डॉ. रितेश ब्रह्मभट्ट, नर्सिंग स्टाफ, जिला सामाजिक सुरक्षा अधिकारी श्री जिग्नेश चौधरी, जिला बाल संरक्षण इकाई की पूरी टीम, चाइल्ड लाइन -1098 की टीम आदि उपस्थित थे और उन्होंने अपनी भूमिका निभाई।

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