गणांधिपति पूज्य गुरुदेव श्री तुलसी के पच्चीसवें र्निवाणं दिवस पर श्रद्धासिक्त भाव सुमन 🙏…सुरेंद्र मुणोत ,सहायक संपादक आल इंडिया, Key Line Times

तेजोदीप्त मुखमंडल उन्नत सूर्य सा चमकता भाल ,
नेत्र युगल की शोभा न्यारी तथागत बुद्ध से कान ।
पावन आभामंडल तेरा गरजदार भारी आवाज ,
मधुर स्वर में गायन करते संगीत का अदभूत ज्ञान ।
स्वरों का आरोह – अवरोह परिषद मंत्र मुग्ध हो जाती
तेरा जिकारा जन-जन के मन की पीड़ा हर लेता ।
ना जाने कहाँ खो गये माँ बदनां जी के लाल ।
पूर्णमासी का चंद्रमा फीका पड़ गया आज ?
आज रोशनीं आप करो फीका सुरज का तेज ,
नखत आज हड़बड़ा गये हवा भी हुई अवरूद्ध ?
आज बिलखती मनुंजता ओ द्वितीया के चाँद ,
पीर हमारे हृदय की अब तो समझ ही जाओ ?
एक बार तो दर्श दिखलाओ लाडाँ जी के बीर ,
पद्मासन में विराजते देते सरस मधुर व्याख्यान।
जनता मन में सोचती कह दी उनके मन की बात ,
समणं श्रेणीं, आगम संपादन अणुव्रत नारी उत्थान ।
महाप्रज्ञ, महाश्रमणं, महाश्रमणीं किया अनूठा काम ,
तीव्र गति से चली लेखनीं भर दिया गणं का भंडार ।
भावी पीढ़ी रहें निश्चिंत कहीं कभी ना अटके काज ,
पदविर्सजन करके तुमनें निश्प्रहता का मान बढ़ाया ।
र्निलेप कमल सा तेरा जीवन दुनियां को बतलाया ।।

सरोज दुगड़
खारुपेटिया
असम
🙏🙏🙏

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