ज्ञान और आचार को जोड़ता हैं संस्कार- आचार्य महाश्रमण…सुरेंद्र मुनोत, ऐसोसिएट एडिटर आल इंडिया, Key Line Times

ज्ञान और आचार को जोड़ता हैं संस्कार- आचार्य महाश्रमण

शांतिदूत का दो दिवसीय प्रवास पश्चात चित्तौड़ से मंगल विहार

पूज्यप्रवर के सानिध्य में ‘महाश्रमण सेतु’ का लोकार्पण

13 जुलाई 2021, मंगलवार, पुठोली , चित्तौड़गढ़, राजस्थान

अपनी यात्राओं द्वारा देशभर में सद्भावना, नैतिकता एवं नशामुक्ति की अलख जगाने वाले शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का चित्तौड़गढ़ में दो दिवसीय प्रवास पश्चात आज मंगल विहार हुआ। ऐतिहासिक मेवाड़ प्रवेश एवं भव्य मेवाड़ स्तरीय स्वागत समारोह से हर श्रद्धालु उल्लसित और उमंगित हैं। प्रातः शांति भवन से विहार कर गुरुदेव जैसे-जैसे शहर के प्रमुख मार्गो से पधार रहे थे, स्वागतोत्सुक श्रावक-श्राविकाओं की आतुरता भी बढ़ती जा रही थी। हर कोई शांतिदूत की एक झलक पाने को तरस रहे थे। आचार्य श्री के सान्निध्य में एक फ्लाईओवर ब्रिज का कांग्रेस नेता पूर्व विधायक श्री सुरेन्द्र जाड़ावत, नगर सभापति श्री संदीप शर्मा द्वारा “महाश्रमण सेतु” नामकरण किया गया। श्रावक समाज की अर्ज पर अतिरिक्त विहार कर गुरुदेव स्थानीय तेरापंथ भवन में पधारे एवं श्रद्धालुओं को पावन संबोध प्रदान किया। वर्धमान जैन स्थानक में भी आचार्य श्री ने पगलिया किए। स्थान-स्थान पर भक्तों को आशीष प्रदान करते हुए लगभग 11.5 किमी. विहार कर गुरुदेव पुठोली के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में पधारे। इस अवसर पर सरपंच श्री महिपाल सिंह शक्तावत ने ग्रामवासियों संग आचार्य श्री का स्वागत किया।

मंगल प्रवचन में प्रेरणा देते हुए गुरुदेव ने कहा- ज्ञान और आचार इन दोनों का जोड़ा होता है। व्यक्ति नें किसी चीज को जान लिया ज्ञान कर लिया फिर वह जीवन में वैसा आचरण करें यह जरूरी है। जानना एक बात है और आचार एक बात। व्यक्ति को पता है की चोरी करना बुरा है, हिंसा करना, मारपीट, बेईमानी करना गलत है, पता है। परंतु वह आचरण में नहीं होती। इसके लिए संस्कार का होना बहुत आवश्यक है। संस्कार, ज्ञान और आचार के मध्य सेतु का काम करता है। जब बार-बार भीतर तक यह संस्कार पुष्ट होते हैं कि यह कार्य करना है, यह नहीं तब ज्ञान आचरण में आता है।

गुरुदेव ने आगे कहा कि- आज विद्यालयों में बच्चों को विविध विषयों का ज्ञान कराया जाता है। साथ में उनमें अच्छे संस्कार भी पुष्ट हो यह आवश्यक है। ज्ञान वह प्रकाश है जो अज्ञान के अंधकार को दूर करता है। बच्चे ही आगे जाकर देश का भविष्य बनते हैं। बचपन से उनमें अच्छे संस्कारों का वपन होना चाहिए। हमारे यहां ज्ञानशाला चलती है। उनमें कितने ही बच्चों को अच्छे संस्कार, धर्म के संस्कार दिए जाते हैं। देखकर लगता है कि कुछ निष्पत्ति परक कार्य हो रहा है। बच्चों के ज्ञान के साथ संस्कारों पर भी ध्यान दिया जाए तो भविष्य अच्छा बन सकेगा।

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