पापकर्मों से बचने का हो प्रयास – आचार्य महाश्रमण.. Surendra Munot, Associate Editor All India,Key Line Times

पापकर्मों से बचने का हो प्रयास – आचार्य महाश्रमण

पूज्य प्रवर ने किया आठ प्रकार की पृथ्वी भूमियों का वर्णन

28 जुलाई 2021, आदित्य विहार, तेरापंथ नगर, भीलवाड़ा, राजस्थान

शांतिदूत आचार्य महाश्रमण जी के पावन सान्निध्य में तेरापंथ नगर भीलवाड़ा में धर्म,अध्यात्म की निर्मल धारा निरंतर प्रवाहित हो रही है। ठाणं सूत्र पर आधारित आपकी अमृतमय वाणी से चतुर्विध धर्मसंघ को ज्ञान की दिशा में आगे बढ़ने का तत्व बोध प्राप्त हो रहा है। आचार्यप्रवर द्वारा सरल माध्यम से तत्वज्ञान का विवेचन जन-जन के लिए अनुकरणीय है।

मंगल देशना देते हुए पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण ने आठ प्रकार की पृथ्वी भूमि का उल्लेख किया- रत्न, शर्करा, बालुका, पंक, धूम, तम, महातम और ईशव प्रभा। पहली सात पृथ्वियां अधोलोक में होती है। ईशव प्रभा ऊर्ध्व लोक में है। पहली सात पृथ्वियां नरक की श्रेणियां है। इस सृष्टि में जीव शुभ और अशुभ कर्मों का अर्जन करके अगली गति को प्राप्त होता है, जैसे कर्म वैसी गति। संसारी जीवों की चार जन्म स्थितियां है – नरक, तिर्यंच, मनुष्य और देव गति। मनुष्य मरकर अपने कर्म अनुसार उपरोक्त चारों गति में जा सकता है। मनुष्य गति में जाकर मनुष्य मोक्ष को भी प्राप्त हो सकता है। सिद्धान्त के अनुसार वर्तमान नारकीय जीव पुनः नरक में नही जा सकते है, देव गति के जीव भी देव आयुष्य बंध के कारण नरक में नही जा सकते है। तिर्यंच गति के जीव नरक में जा सकते है, मनुष्य गति वाले भी नरक में जा सकते है पर जो साधनाशील संयमी साधु है वो नरक में नही जाता।

गुरुदेव ने आगे कहा कि नरक बंध के चार कारण है- महाआरंभ, महापरिग्रह, पंचेंद्रिय वध एवं मांसाहार। कभी-कभी नारकीय जीवों को भी तीर्थंकर उपदेश से सुखानुभूति प्राप्त हो सकती है। व्यक्ति को यह ध्यान रखना चाहिए कि अगर कभी जान-अनजान में वकोई पापकर्म हो जाए तो उसका प्रायश्चित करके हल्का बन ले। जहा तक हो सके हिंसक प्रवृतियों से बचने का प्रयास होना चाहिए ताकि नरक के बंधनों से बच सके। चातुर्मास काल के इस अवसर पर व्यक्ति छोटे-छोटे जीवों की हिंसा से बचते हुए अपने आत्महित की सुरक्षा करे।

कार्यक्रम में मुनि प्रसन्न कुमार, मुनि अतुल कुमार ने भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ सभा मंत्री शुभ करण मारू, आचार्य भिक्षु सेवा संस्थान आर. के. आर. सी. अध्यक्ष दिनेश कांठेड़, आचार्य तुलसी सेवा संस्थान शास्त्रीनगर अध्यक्ष गणपत पितलिया, तेरापंथ महिला मंडल पूर्व अध्यक्षा श्रीमती विमला रांका, उपासिका श्रीमती पारस मेहता ने वक्तव्य दिया।

गुरुवर के चरणों में बारंबार नमन वंदन

R.k.jain, Editor in Chief, Key Line Times

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