अप्रमत्त रहकर हो साधना – आचार्य महाश्रमण… Surendra Munot, Associate Editor,All India,Key Line Times

अप्रमत्त रहकर हो साधना – आचार्य महाश्रमण

पूज्यप्रवर ने दी संयम के प्रति जागरूक रहने की प्रेरणा

29 जुलाई 2021 गुरुवार, आदित्य विहार, तेरापंथ नगर, भीलवाड़ा, राजस्थान

आदित्य विहार तेरापंथ नगर में शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का ठाणं सूत्र पर आधारित प्रवचनमाला का अनवरत क्रम गतिमान है। गुरुदेव के प्रवचन श्रवण से श्रावक समाज में नित नई ज्ञान चेतना का विकास हो रहा है।

पूज्य आचार्यप्रवर ने मंगल उद्बोधन में कहा- कुछ बातों के प्रति कभी प्रमाद नही करना चाहिए। इन बातों के प्रति साधु समुदाय को सदैव जागरूक, सजग और सचेत रहना चाहिए। पहली बात है अश्रुत धर्म को सुनने का प्रयास होना चाहिए। जो पहले कभी नहीं सुना और जो नया हो उसे सम्यक रूप से सुनने का प्रयत्न हो और फिर सुने हुए धर्म का मानसिक ग्रहण होना चाहिए। जो भी धर्म श्रवण किया, सीखा उसका चितारना होते रहना चाहिए ताकि हमारा ज्ञान सुरक्षित रह सके। संयम के द्वारा नए कर्मों का बंधन न हो ऐसा प्रयास रहना चाहिए। साधु का आचार-विचार, व्यवहार संयमित रहे। तपस्या के द्वारा नए कर्मो का बंध न हो और पुराने कर्मों की निर्जरा हो ऐसा प्रयास निरंतर रहे।

आचार्यवर ने आगे कहा कि ग्लान की सदा वैयावृत्य होनी चाहिए। अर्थात जो साधु रूग्ण, बीमार, असक्षम हो उसकी पूरी तन्मयता के साथ सेवा की जाए, सेवा में व्यवस्था देने वाले और नियोजित होने वाले अपनी जागरूकता का परिचय दे। सेवाग्राही साधु-संतो को चित्त समाधि मिले, उनकी अपेक्षाओं की सम्यक पूर्ति होती रहे ऐसा प्रयास करना चाहिए। सधार्मिकों में परस्पर प्रेम, सौहार्द्र और शांति की भावना बनी रहे। कभी कोई समस्या आगयी तो समस्या का समाधान निष्पक्षता के साथ हो ऐसी अप्रमत्तता बनी रहनी चाहिए। उपरोक्त बातों के प्रति जागरूकता रहे, अप्रमत्त रहकर साधना हो तो सामुदायिक जीवन अच्छा रह सकता है और आत्मा का कल्याण हो सकता है।

कार्यक्रम में मुनि अनुशासन कुमार ने आचार्यवर से आठ की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। इस अवसर पर निर्मल कुमार खाब्या, श्रीमती रिंकी, श्रीमती मधु, श्रीमती हिना, श्रीमति सुजिता ने भी अठाई आदि तपस्या का प्रत्याख्यान किया। मुनि पारस कुमार ने अपनी भावनाएं व्यक्त की। समण संस्कृति संकाय लाडनूं और अभातेयुप के तत्वावधान में 01 अगस्त से आयोजित आचार्यप्रवर की कृति “तीन बातें ज्ञान की” पर आधारित कार्यशाला के बैनर का अनावरण किया गया। कार्यक्रम में टीपीएफ राष्ट्रीय अध्यक्ष नवीन पारेख, महाप्रज्ञ सेवा संस्थान बापूनगर के पूर्व अध्यक्ष कमल दुगड़, चातुर्मास प्रवास समिति से अनिल चोरड़िया, ट्रस्टी भगवती चपलोत, अपेक्षा पामेचा, लवीश आच्छा और अभिनव चोरड़िया ने गुरुचरणों में विचारों की अभिव्यक्ति दी।

गुरुवर के चरणों में नमनकर्ता..

R.k.jain

Editor in chief

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