साधना की निष्पत्ति है मोक्ष – आचार्य महाश्रमण… Surendra munot, Associate Editor All india,Key Line Times

साधना की निष्पत्ति है मोक्ष – आचार्य महाश्रमण

पूज्य प्रवर ने किया नव तत्वों का विवेचन

02 अगस्त 2021, सोमवार, आदित्य विहार, तेरापंथ नगर, भीलवाड़ा, राजस्थान

अपनी ज्ञानमय वाणी से जन-जन के अज्ञान रूपी अंधकार को हरने वाले अहिंसा यात्रा प्रणेता शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी का ससंघ भीलवाड़ा में सानन्द चातुर्मास प्रवर्धमान है। एक ओर जहां आचार्यश्री वर्चुअल देशना के माध्यम से प्रतिदिन अमृत देशना दे रहे है वहीं श्रद्धालुओं का आवागमन भी निरन्तर जारी है। निर्धारित व्यवस्थानुसार दर्शन-सेवा का भी सभी लाभ ले रहे है।

मंगल प्रवचन में जैन तत्वज्ञान का विश्लेषण करते हुए जैनाचार्य श्री महाश्रमण ने कहा – जैन दर्शन में संपूर्ण जगत का दो प्रकार से वर्गीकरण किया गया है। पहला छह द्रव्य और दूसरा नव पदार्थ है। छः द्रव्य है – धर्मास्तिकाय, अधर्मास्तिकाय, आकाशास्तिकाय, पुद्गलास्तिकाय, जीवास्तिकाय और नव तत्व है – जीव, अजीव पुण्य, पाप, आश्रव, संवर, निर्जरा, बंध, मोक्ष। जहां अस्तित्व से जुड़ी चर्चा है वहा छः द्रव है और जहां जीवत्व की चर्चा है वहा नव तत्व का बहुत महत्व है। नव तत्वों में जीव – अजीव में भेद का आधार चेतन्यता है, पुण्य- पाप में कर्मों का शुभत्व- अशुभत्व, आश्रव – संवर में कर्म आवागमन-कर्म अवरुद्धन वहीं निर्जरा में कर्मो को तोड़कर आत्मा की उज्जवल्लता की बात आती है। बंध -मोक्ष में कर्मों का बंधन और कर्मों का टूटना भिन्नता के आधार बनते है। नव तत्वों को अच्छी तरह समझने से अध्यात्म का मार्ग प्रशस्त बन सकता है।

आचार्यवर ने आगे फरमाया कि साधना की निष्पति मोक्ष है। मोक्ष के दो आयाम है -संवर और निर्जरा। नव तत्वों का सारांश संवर और निर्जरा है इनसे मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है। संवर की साधना मजबूत हो तो निर्जरा होती ही है। अध्यात्म की साधना में हम मोक्ष मार्ग का वरण करे यही काम्य है।

तपस्या के क्रम में श्री छीतरमल मेहता ने पंद्रह, आशीष गोखरू ने नौ की तपस्या का गुरुदेव से प्रत्याख्यान किया।

कार्यक्रम में मॉर्निंग क्लब बसंत नगर कर्नल रमेश चंद्र लढ़ा, चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति ट्रस्टी राजू भलावत, महाप्रज्ञ सेवा संस्थान बापूनगर पूर्व अध्यक्ष मदन लाल टोडरवाल, वत्सल रांका, धृति रांका ने अपने विचार रखे।

गुरुवर के चरणों में नमन

नमनकर्ता, R.k.jain, editor in chief,Key Line Times

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