सरकारी माध्यमिक स्कूल आहवा में 72वां जिला स्तरीय वन महोत्सव मनाया गया

– मनीष पालवा

गुजरात,आहवा-डांग:
दिनांक-14: 72वें वन महोत्सव के अवसर पर गुजरात वन रेंजर्स कॉलेज के प्रिंसिपल श्रीअक्षय जोशी ने कहा कि आज के युग में कोरोना से बचने के लिए जंगल को बचाना बहुत जरूरी है,क्योंकि कोरोना के समय में ऑक्सीजन के लिए जंगलों को बचाना बहुत जरूरी है।कोरोना महामारी के समय में हमें और हमारे बच्चों को आने वाले दिनों के लिए जंगलों को बचाना बेहद जरूरी है।

दक्षिण डांग विभाग के डीसीएफ श्रीनीलेश पंड्या ने प्राथमिक भूमिका देते हुए कहा कि 2446 हेक्टेयर वन क्षेत्र में कुल 27.60 लाख पौधे लगाए गए हैं। वन महोत्सव योजना के तहत डांग ने 9.50 लाख पौधे लगाए हैं, जिनमें से कुल 7.50 लाख पौधे बांटे जा चुके हैं।वहीं डांग के भगतो (वैद्यों) के लिए एक लाख पौधे बांटे जाएंगे। पिछले कुछ वर्षों में वनरोपण के पौधे वितरण के साथ-साथ अन्य संबंधित गतिविधियों को लागू किया गया है।पिछले 71 वर्षों से हम नियमित रूप से स्वर्गीय कनैयालाल मुंशी वन महोत्सव आंदोलन चला रहे हैं।जिसके एक भाग के रूप में आज सरकारी माध्यमिक विद्यालय आहवा में 72वां जिला स्तरीय वन महोत्सव पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा है।डांग जिला प्रकृति में समृद्ध है। इस प्रकार, डांग जिले में राज्य में सबसे अधिक पेड़ हैं। पेड़ पृथ्वी का खजाना हैं जिनकी हमें रक्षा करनी चाहिए।पर्व के अवसर पर डांग जिले के मालिकी के लाभार्थीयो को 172.28 लाख रुपये के चेक, वाडी योजना के तहत 25 लाख आम के पौधों वितरित किए जाएंगे। सराहनीय कार्य करने वाले आठ वन कर्मियों की सराहना की जाएगी।

72वें वन महोत्सव के अवसर पर डांग कलेक्टर भाविन पंड्या ने कहा कि वन महोत्सव 1950 से मनाया जा रहा है। वन महोत्सव तब से मनाया गया जब गुजरात के कन्यालाल मुंशी वन मंत्री थे।डांग जिला प्रकृति में समृद्ध है। राज्य में डांग जिले में सबसे अधिक पेड़ हैं। कोरोना के समय में हम स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त रहे हैं जो मुख्य रूप से जंगल और प्रकृति के कारण है।मुख्य रूप से वनों के कारण राज्य में सबसे कम कोरोना के मामले डांग के थे।डांग एक स्वच्छ वायु और प्रदूषण मुक्त जिला है, इसलिए हम डांग जिले के निवासी आने वाले दिनों में कोरोना से मुक्त रहने के लिए पेड़ों की अधिक से अधिक देखभाल करें।

डांग विधायक विजयभाई पटेल ने 72वें वन महोत्सव के मौके पर कहा कि डांग के राजवीओं ने ने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी और डांग के पूर्वजों को बचाया। जंगल प्रकृति से जुड़ा है। डांग जिला पेड़ों से आच्छादित है, जंगलों के कारण डांग ऑक्सीजन से भरपूर है। मुख्य रूप से जंगल के पेड़ों के कारण डांग में कोरोना महामारी के कारण बहुत कम मौतें हुई हैं।पेड़ों की देखभाल करना हमारे लोगों की जिम्मेदारी है। जंगल है तो जीवन है। हमने अपने पूर्वजों द्वारा वनों को बचाया है इसलिए हमें आज जमीन के मालिकी के चेक मिले हैं।पेड़ जन्म से लेकर मृत्यु तक लकड़ी हमारे लिए उपयोगी बनाते हैं।आज वन महोत्सव के अवसर पर हम अपने जन्मदिन पर पेड़ लगाने का संकल्प लेते हैं ताकि आने वाली पीढ़ियों को कोरोना से बचाया जा सके।

72वें वन महोत्सव के अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष मंगलभाई गावित ने कहा कि सही मायने में यह डांग के लोगों की जिम्मेदारी है, जिसके कारण हम प्रकृति से सुशोभित है।डांग के पांच राजाओं ने जंगल को बचाया है, यही कारण है कि हम अभी भी पेड़ों से ऑक्सीजन और प्राणवायु मिल रहा है।पेड़ों का महत्व हमने कोरोना के समय में देखा है.अगर हम आने वाले दिनों में खुशियों का आनंद लेना चाहते हैं, तो हमें पेड़ों की देखभाल करनी चाहिए,जो आने वाले दिनों में हमें बचायेगा।

इसके बाद गणमान्य व्यक्तियों ने लाभार्थियों को मालिकी योजना, वाडी योजना आम पौधों, प्रशस्ति पत्र, मोमेंटो के चेक वितरित किए। इसके बाद सरकारी माध्यमिक विद्यालय आहवा में पौधारोपण किया गया।72वें वन महोत्सव के अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री रवीन्द्रसिंह जाडेजा, रेजिडेंट अपर कलेक्टर पद्मराज गावित, ग्रामीण विकास निदेशक डी.एन.चौधरी, प्रायोजन अधिकारी के.एच.भगोरा, प्रान्त अधिकारी काजल गामित,उप जिला विकास अधिकारी आर.बी. चौधरी, मार्ग मकान स्टेट एस.आर.पटेल, आहवा ग्राम पंचायत हरिराम सावंत, वसुरणा राजवी सहित पिपरी राजवी सहित अन्य अधिकारी एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।कार्यक्रम के अंत में आरएफओ राहुल पटेल ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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