सत्संगति हो सकती है कल्याणकारी: शांतिदूत महाश्रमण .आर.के.जैन, एडिटर इन चीफ, Key Line Times

प्रसिद्ध साहित्यकार डा.कुसुम लुनिया जी द्वारा साभार प्राप्त..

-राष्ट्रीय संत ने दी संतों की पर्युपासना करने की पावन प्रेरणा

-गुरुदर्शन करने के उपरान्त चारित्रात्माओं ने दी भावनाओं को अभिव्यक्ति

-दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने भी पूज्यचरणों में अर्पित की अभिवंदना

15.03.2022, मंगलवार, अध्यात्म साधना केन्द्र, छत्तरपुर (दिल्ली)
जन-जन का कल्याण करते हुए भारत के लगभग बीस राज्यों में सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति की अलख जगाते हुए जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना संग अध्यात्म साधना केन्द्र में विराजमान हैं। शासनमाता साध्वीप्रमुखा साध्वी कनकप्रभाजी को आचार्यश्री निरंतर चित्त समाधि प्रदान करने के लिए सूर्योदय के बाद से कई बार उन्हें आध्यात्मिक शांति, मनोबल और गुरुप्रसाद प्रदान करने पधारते हैं। अपने गुरु की कृपा प्राप्त कर शासनमाता भी असीम शांति का अनुभव करती हैं। दिल्लीवासियों का तो मानों भाग्य खुल गया है। दिल्लीवासी निर्धारित समय से पहले ही अपने आराध्य को अपने निकट पाकर भावविभोर नजर आ रहे हैं। अपने आराध्य के दर्शन, उपासना और सेवा में निरंतर रत दिखाई देते हैं। मंगलवार को वर्धमान समवसरण से भगवान वर्धमान के प्रतिनिधि आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को मंगल पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी साधु-संतों के पास जाता है। उनकी निकट पर्युपासना, उपासना, व दर्शन-सेवा का लाभ प्राप्त करता है। जो साधु अहिंसा, संयम और तप का अनुपालन करने वाले होते हैं, जो शांति के प्रतीक होते हैं, उनके दर्शन से शांति और पावनता प्राप्त होती है और कर्म निर्जरा भी होती है। जिन साधुओं का अहिंसा जैसा पथ है, जो तन, मन और वचन से किसी को दुःख नहीं देते, ऐसे साधुओं के दर्शन से पुण्य का लाभ प्राप्त होता है। साधु तो चलते-फिरते तीर्थ होते हैं। उनसे प्रेरणा मिल सकती है, अच्छा ज्ञान प्राप्त हो सकता है। मानव जीवन दुर्लभ है तो इस दुर्लभ मानव जीवन का लाभ उठाने का प्रयास करना चाहिए। धर्म की बातों को सुनना भी दुर्लभ बताया गया है। आदमी साधुओं से मंगल प्रवचन का श्रवण करे और प्रवचन के दौरान आदमी यदि सामायिक कर ले तो उसे और अधिक लाभ प्राप्त हो सकता है। उनसे ज्ञान की बातें सुनने को भी मिलती हैं। उसका चिंतन और मनन हो जाए तो आदमी विशेष ज्ञान भी प्राप्त हो सकता है। विशेष ज्ञान होने के बाद हिंसा, चोरी, झूठ आदि का प्रत्याख्यान हो तो आदमी मोक्ष की दिशा में गति कर सकता है। मानव जीवन में सत्संगति को कल्याणकारी बताया गया है। आदमी अच्छे सज्जन व विद्वान की संगति करे तो भी उसे कुछ लाभ प्राप्त हो सकता है। इसलिए आदमी साधुओं की पर्युपासना और सत्संगति करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने नित्य की भांति शासनमाता साध्वीप्रमुखाजी के लिए मंत्र का जप कराया। तत्पश्चात् दिल्ली के उत्तमनगर तेरापंथी सभा के अध्यक्ष श्री रमेश जैन, नांगलोई सभा के अध्यक्ष श्री अमित जैन, पश्चिम विहार सभा के अध्यक्ष श्री श्यामलाल जैन, रोहिणी सभा के अध्यक्ष श्री मदनलाल जैन ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। बालक मंथन ढेलड़िया ने गीत का संगान किया। रोहिणी क्षेत्र के तेरापंथी समाज द्वारा गीत का संगान किया गया। गत चतुर्मास रोहिणी में करने वाली साध्वी रतनश्रीजी आदि साध्वियों ने भी गीत के माध्यम से अपनी विनयांजलि पूज्यचरणों में अर्पित की।

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