बाडमेर के चांदेसरा मे औलाद ने आंखें फेरी, कानून बना मददगार…सरूपाराम प्रजापत, जिला ब्यूरो चीफ, बाडमेर, Key Line Times

औलाद ने आंखें फेरी, कानून बना मददगार
-चांदेसरा की सुरमी बानो को अदालत से मिला इंसाफ
-हकतर्क खारिज करने के साथ ही भरण-पोषण के लिए प्रतितोष राशि देने के आदेश
-आखिर मां जो ठहरी, सितम करने वाली औलाद के लिए सलामती की दुआ

की लाइन टाइम मुख्य संवाददाता
सरूपाराम प्रजापत.
बाड़मेर। चांदेसरा गांव की सुरमी बानो को आखिरकार इंसाफ मिला। फर्ज भूलकर औलाद ने आंखें फेर ली, लेकिन कानून ने उसके जख्मों पर न्याय का मरहम लगाया। उपखण्ड मजिस्ट्रेट बालोतरा डॉ. नरेश सोनी की अदालत ने जब फैसला सुनाया तो पिचयासी साल की बुढ़िया के दर्द का गुब्बार आंसुओं के रूप में झुर्रियों से परनाल की मानिंद बह निकला। बेटे और बहू ने बेवा मां को प्रताड़ित किया। प्रताड़ना जब बर्दाश्त से बाहर हो गई तो सुरमी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उपखण्ड मजिस्ट्रेट डॉ. नरेश सोनी ने फैसला सुनाते हुए सुरमी बानो के हिस्से की जमीन का हकतर्क खारिज करते हुए जमीन का मालिकाना हक पुनः सुरमी को देने के आदेश दिए। साथ ही पुत्र बच्चू खां को माता-पिता भरण-पोषण व वृद्धजन कल्याण अधिनियम 2007 के तहत भरण-पोषण के लिए अपनी मां सुरमी बानो को प्रतिमाह 2 हजार रुपये बतौर प्रतितोष राशि देने के आदेश दिए। शिकायत दोबारा पाए जाने पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। परिवादिनी सुरमी बानो की तरफ से एडवोकेट डूंगर सिंह नामा ने व विप्रार्थी की ओर से अधिवक्ता रुघाराम कडवासरा ने पैरवी की।

यह था मामला – सुरमी बानो के पति बींजे खां की फौतगी के बाद उसके बेटे बच्चू खां ने अपनी मां के हिस्से की जमीन का हकतर्क भी अपने पक्ष में करवा लिया। पिचयासी साल की सुरमी बानो ने वाद में आरोप लगाया कि आए दिन बेटा व बहू उसे प्रताड़ित करते। उसे एवड चराई व खेजड़ी के लूंख उतारने के लिए जंगल में भेज देते। एक रात धक्के मारकर घर से बाहर निकाल दिया। सुरमी ने भाई के घर शरण लेकर आपबीती सुनाई। इसके बाद अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अपने ही बन गए बेगाने -फैसले के बाद सुरमी ने कहा कि जिस औलाद के लिए कभी उसने मुरादें मांगी थी, उसी ने आंखें फेर ली। लेकिन अदालत का फैसला उसके लिए मरहम बना है। बेटे व बहू की इस खता के लिए रमजान के पाक महिने में मालिक उन्हें माफ करे। मैं उनकी सलामती के लिए दुआ करती हूं।।

ताकि सम्मान भरी जिंदगी बसर कर सके बुजुर्ग – माता-पिता के साथ बदसलूकी व अन्याय करने वालों के खिलाफ कानून में कार्रवाई का प्रावधान है। इस फैसले को वे लोग सबक के तौर पर लें, जो फर्ज भूलकर अपने बुजुर्ग मां-बाप के साथ बदसलूकी करते हैं। बुजुर्गों को सम्मान व स्वाभिमान के साथ जीने का पूरा-पूरा हक है।
डाॅ. नरेश सोनी
उपखण्ड मजिस्ट्रेट,बालोतरा

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