आचार्य मणिप्रभ सागर जी के बालेसर आगमन पर जैन श्री संघ ने किया स्वागत..

बालेसर में प्रवचन के बाद विहार कर 23 तारीख को सेतरावा पहुंचेंगे

जोधपुर । बालेसर में संत मणिप्रभ सागर महाराज के बालेसर पहुंचने पर जैन श्री संघ ने स्वागत किया। महाराज ने मंदिर में चंद्रप्रभु व दादावाड़ी के दर्शन किए उसके बाद प्रवचन में उन्होंने कहा कि जीवन में कभी पाप करना पड़े तो मजबूरी में करो उस पीड़ा को अनुभव करो, किंतु पाप कभी प्रसन्नता से नहीं करना चाहिए जब भी धर्म करने का मौका मिले तब ह्रदय में आनंद का अनुभव करते हुए करना चाहिए। प्रवचन के दौरान उन्होंने कहा कि जीवन क्षण भंगुर है कब इसका अंत होगा कोई पता नहीं है । इसलिए जीवन को सार्थक बनाने का प्रयत्न करना चाहिए यह जीवन रोने के लिए और सोने के लिए नहीं है । एवं उनके शिष्य मुनि मयूखप्रभ सागर ने मनुष्य जीवन की तुलना चिंतामणि रत्न के साथ करते हुए कहा कि जैसे रत्न हमेशा नहीं मिलता वैसे जीवन भी हमेशा नहीं मिलता बालेसर में प्रवचन के बाद बालेसर से विहार करते हुए 23 तारीख को सेतरावा पहुंचेंगे जहां पर आदिनाथ जैन मंदिर का जीर्णोद्वार कार्य प्रारंभ करेंगे । बालेसर प्रवचन में तिंवरी सेतरावा सोमेसर सहित आसपास के गांवों से श्रद्धालु पहुंचे । इस मौके पर मदनलाल गुलेछा, उगमराज बाफना, लाभचंद सांखला, गजेंद्र सांखला, रमेश कुमार सांखला, रावलचंद चोरड़िया, रावलचंद गुलेछा,अरविंद सांखला, जवरीलाल भंडारी, भवरलाल चोरड़िया, स्वरूप चंद बाफना, राजेंद्र सांखला, चंदनमल वैध, मनीष वैध, मनोहरलाल गुलेछा, दौलतराज सांखला ,सहित सेतरावा श्री संघ के गणमान्य लोग मौजूद थे।

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