साइबेरिया से आई 20 हजार कुरजां मार्च में वतन को लौटी,10घायल होने से उड़ नहीं पाई

इनके लिए 30 डिग्री पारा ही अनुकूल

रामदेव बिश्ऩोई सजनाणी रिपोर्टर
घंटियाली। चीन, मंगोलिया व कजाकिस्तान से फलोदी क्षेत्र में शीतकालीन प्रवास पर आने वाली हजारों कुरजां मार्च में ही अपने वतन लौट चुकी है। करीब 20 हजार कुरजां खीचन, जांबा व आसपास के गांवों के तालाबों पर डेरा डालती है। सितम्बर में छह महीने के लिए यहां आती है और मार्च में लौट जाती है।इस दौरान घायल हुई 10 कुरजां उड़ नहीं पाने के कारण झुंड से बिछड़ गई । इनमें 4 जांबा तालाब के तट पर व 6 खीचन तालाब पर विचरण कर रही है।इन दिनों यहां का पारा 45 डिग्री क के पास चल रहा है। जबकि इन पक्षियों के लिए तापमान 30 डिग्री तक ही अनुकूल है।भीषण गर्मी में भी वातावरण के साथ सामंजस्य बनाने में जुटी कुरजां की जीवटता से पक्षी विशेषज्ञ भी हैरान हैं।
गर्मी में बदला रंग
पक्षी विशेषज्ञ डॉ सुमित डउकिया ने बताया कि गर्मी के कारण कुरजां का रंग गहरा हो जाता है। इससे बीमार होने का भी खतरा रहता है गर्मी में चुग्गा भी कम लेती है। जांबा में जांभोलाव तालाब के तट पर चार विचरण कर रहे हैं। यहां उनके लिए चुग्गे की व्यवस्था की गई है।

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