सुल्तानपुर, उ.प्र.,कादीपुर मे विद्युत मे खुलेआम भ्रष्टाचार

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के अखण्डनगर व कादीपुर दोस्तपुर में लूट और भ्रष्टाचार की खुली छूट का कौन जिम्मेदार ?

ब्युरो चीफ विमल कुमार दुबे सुल्तानपुर

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सुल्तानपुर अखण्डनगर
13 मई मध्यांचल विद्युत वितरण निगम मे भ्रष्टाचार खुलकर बोल रहा है और अपनी पोल खुद ही खोल रहा है यहा दोंनो ही जगह लूट की होड लगी हुइ है तो जनाब हम आते है पहले जहा सबसे ज्यादा मलाई गिरती रहती है और यहाँ पर सबसे ज्यादा चार्जशीट मिलने का रिकार्ड भी बना है तो अब बात करते है सुल्तानपुर के सर्किल अखण्डनगर और सुलतानपुर के सभी गांव में बिजली विभाग की अगर भ्रष्टाचार की बात की शुरुवात करे तो शायद यह बिजली विभाग के हित मे होगा हम वह कलम की धार और उससे निकलने वाली स्याही के रखवाले और जिम्मेदार है कि हमारी शब्दो की लिखी कलम किसी को चुभती है और सही सोच से सेवा करने करने वाले मुखिया को आगाह करती है पर हमारे लिखने की परवाह न करने वाले बडे साहबो ने अपने खूब सुजवाने मे मशगूल देखे जा रहे है ।

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क्योकि बिजली विभाग मे चलता है चाँदी का जूता अधीनस्थ अधीक्षण अभियन्ता कादीपुर या सुल्तानपुर को सर्किल अखण्डनगर के चौराहे पर जान का खतरा कभी नही दिखता जबकि यहां कभी भी बिजली से कई लोगों की जान जा सकती है और अन्य गांवों में भी बिजली विभाग की लापरवाही दिखी आखिरकार बिजली विभाग के बड़े आलाधिकारियों ने J,E,, S,D,O को लूट की खुली छूट दे रखी है और दे भी क्यों न मुँह जो सूजता रहता है समय-समय पर चाहे अन्डर ग्राउन्ड केबिल का मामला हो या फ़िर खाते मे मलाई गिरने का छोटे टेण्डर के घोटाले बाज मास्टरमाइंड डुअल चार्ज बाबू प्लान बना कर अपने मुखिया को चाँदी के जूते से मार-मार कर इतना मुँह सुजाता है कि महोदय को सर्किल के दफ्तर मे मात्र तथाकथित बाबू के अलावा पूरा दफ्तर कामचलाऊ या नकारा नजर आता है उसका मुख्य कारण उनके ऊपर बैठे इलाहाबादी बडे वाले साहब पूरे UPPCL मे अपना सबकुछ लूटा कर भ्रष्टाचार की दौलत कमाने में एक कीर्तिमान बनाना चाहते है जिसे विभाग के अन्दर उप नाम से जुगाड़ साहबे कहतें है नाम की टाईटिल भले कड़क हो पर UPPCL को लूटने और भ्रष्टाचार करने मे यह किसी गुदड़ी के लाल से कम नही इनका सिद्धांत लूटो और बाटो परन्तु हमारी और सभी पत्रकारों की नजर जब जनाब के सर्किल अखण्डनगर ,, कादीपुर और अन्य जगहों पर पहुची,
तो वहाँ डुअल चार्ज के बाबुओ पर हमारी निगाह पहुची खेल एक मात्र भ्रष्टाचार का चल रहा था क्यो यह डुअल चार्ज मिले अधीक्षण अभियन्ता ने डुअल चार्ज लिए बाबू को पूरी तरह घोटाले करने की छूट दे रखी है और वो बाबू जी भी स्वामी भक्ति दिखाने मे मशगूल नजर आते हैं और साहब के इशारे पर खूब डालिया साफ कराते और जिसक की जगह पर यह आये है यानी इस जगह पर जिसकी नियुक्ती है वह बाबू मात्र कार्यालय के डिस्पैचर देखते हुए देखा जा सकता । लेकिन कहानी यही नही खत्म होती अभी तो हम शुरू हुए है अभी तो खुलासे करने शुरू हुए हैं अब चले सर्किल 1 यहाँ पर तो जो साहब है वो md मध्याचल को तो कुछ समझते नही वो तो सीधे प्रबंध निदेशक महोदया यानी Md uppcl को मलाई लगाने के लिए पहुँच जाते हैं और क्या क्या नही करते कभी क्रिकेट मैच के टिकट दिलाने की चर्चा खुले आम कर के रौब दिखाते है कभी अपने अधीनस्थो के रिश्तेदारो पर भी महरबानी कर के उन्हें बडे बडे टेण्डरो से नवाज़ा देते है इनके राज्य मे कोई भी कार्य मानक के अनुरूप नहीं होता दिखाई देगा। कोई तो यहाँ सीवीसी(cvc) की गाईड लाइन को ही लात मारकर कर किनारे कर देते है और चहेती कम्पनीयो को टेण्डर दे देते है और यही नहीं प्रबंधन निदेशक को भी शीशे मे उतार लेते हैं बडे ही शातिराना तरीके से जनता की सेवा करने मे लगे है यह बेचारे कोई बृंदावन योजना में अपना मुँह चाँदी के जूते से सुजवाकर बडे बडे बिजली के लोड आखें बन्द कर दे देता है और तो कोई बिना टेण्डर प्रक्रिया पूरी हुए ही ठेका दे देता है आज कल रोज ही इन भ्रष्टाचारियों के किस्से समाचार पत्रों / पत्रिकाओं में पढ़ने को मिल ही जाते है और मजे की बात यह है कि प्रबंधन की गाज उन पर गिराई जाती है जो कि बेकसूर होते है और जिनको चार्जशीट मिलती है वो मलाई खाने मे व्यस्त रहते है एक बात और अभी तक गले के नीचे नही उतर रही कि जब से निदेशक कार्य प्रशासन पूर्वांचल वाले बने है तभी से पूर्वांचल से आये अधिकारियों को आते ही तैनाती कैसे मिल जाती है ऐसा कौन सा जादू होता है उनके पास कि आज ही मध्याचल मे पदार्पण हुआ और कल ही लेसा मे उनको चार्ज मिल गया और जो वहाँ पहले से कार्यरत था वो अटैच हो गया । खैर अभी तो पडताल शुरू हुई है आगे आगें देखिये यहाँ पर यानी मध्याचल विद्युत वितरण निगम मे कितने नये और पुराने अनुभवी भ्रष्टाचारी की खबरे नित्य आती रहती है।

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