हरदोई मे निजी विद्यालयों की मनमानी

Dr. Neelesh Kumar
ब्यूरो चीफ हरदोई

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योगी जी! गरीब बच्चों को शिक्षा देने से मना कर रहे निजी स्कूल

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जेके पब्लिक स्कूल ने 11 अध्ययनरत बच्चों को दिखाया बाहर का रास्ता
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हरदोई। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद भी निजी क्षेत्र के स्कूलों में गरीब बच्चों को दाखिला नही मिल पा रहा है। हरदोई में 483 निजी स्कूलों में महज 63 बच्चों का ही दाखिला हो सका है, किन्तु इन्हें भी पढ़ाने से निजी स्कूल मना कर रहे हैं।

शहर के आवास विकास कालोनी स्थित जेके पब्लिक स्कूल ने 11 गरीब बच्चों का दाखिला लेने के बाद उन्हें पढ़ाने से मना कर दिया है। ऐसे में न सिर्फ शासन के आदेशों की अवहेलना है बल्कि गरीब बच्चों और उनके परिजनों को हतोत्साहित करने का भी कृत्य किया गया जा रहा है।

आपको बता दें कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत शासन के निर्देशानुसार प्रत्येक निजी स्कूल केजी, नर्सरी व कक्षा 01 में उपस्थित कुल छात्र संख्या के आधार पर न्यूनतम 25 फीसदी गरीब बच्चों का निःशुल्क दाखिला अनिवार्य रूप से करेंगे। इसका भुगतान उन्हें बेसिक शिक्षा विभाग से प्रति छात्र 5400 रुपये फीस आदि के लिए, व 5000 रुपये अभिभावक को ड्रेस व कोर्स के लिए दिए जाने का प्रावधान है। इसके अलावा विभाग को प्रचार प्रसार के लिए अतिरिक्त धन भी आवंटित किया जाता है।

शासन की इस महत्वपूर्ण योजना में भृष्टाचार का दीमक इस कदर लग गया कि ज्यादातर लोगों को पता ही नही कि गरीब बच्चों का निशुल्क दाखिला कान्वेंट स्कूलों में किया जाता है। इसका लाभ उठाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी निजी स्कूल प्रबंधन से सांठगांठ कर गरीब बच्चों का हक मार रहे हैं। कई स्कूलों ने फर्जी रूप से भी गरीब छात्र दर्शाए हैं। गरीब बच्चों को शिक्षा देने से मना करने वाले कई कान्वेंट स्कूल कथित समाजसेवी व जनप्रतिनिधियों के हैं। ऐसे अन्य स्कूलों का खुलासा अगली खबर में किया जाएगा।

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