गाजियाबाद :राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र की जमीन पर अवैध कब्जा करने वालों पर होगी एफआईआर

गाजियाबाद। नंदग्राम में राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र के लिए चिह्नित जमीन पर हुए कब्जे को नगर निगम खाली कराएगा। नंदग्राम के शांतिनगर कालोनी में जमीन के एक बड़े हिस्से पर करीब 75-80 मकान बने हुए हैं। नगर निगम के संपत्ति विभाग की टीम ने सर्वे कर 25 मकानों में काबिज लोगों का ब्योरा जुटा लिया है। अब इनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। निगम उन लोगों को भी चिह्नित कर रहा है, जिन्होंने निगम की जमीन की रजिस्ट्री कर उन्हें यहां काबिज किया है।वहीं कालोनी वासियों का कहना है कि हमने कोई अवैध कब्जा नहीं किया है न ही कोई सरकारी जमीन कब्जाई है हमने बाकायदा जमीन खरीद कर सरकार को जरूरी शुल्क तथा सेक्टर रेट के हिसाब से स्टांप ड्यूटी देकर जमीन को तहसील से खारिज दाखिल करवा कर ही मकान का निर्माण किया है नगर निगम गरीब लोगों के साथ जबरदस्ती दिखा कर उनको बेघर करना चाहता है अगर हमारे मकान सरकारी जमीन पर बने हैं तो पहले उन लोगों को पकड़ कर जेल में डालो जिन्होंने जमीन बेचा है और जिसने जमीन की रजिस्ट्री की है जब बीस साल पहले मकान के निर्माण हो रहे थे तब नगर निगम सो रहा था क्या, नगर निगम से लेकर तहसील तक सबकी जांच होनी चाहिए पहले जमीन को बेचने वाले डीलर और रजिस्ट्री करने वाले तहसील के बाबुओं को जेल में डालो फिर सारी सच्चाई सामने आ जायेगी कोन कितना सच्चा है,शांति नगर के एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमने जिससे जमीन खरीदी है हम उस पर धोखा धड़ी का मुकदमा दर्ज करवाने जा रहे हैं अगर हमारे साथ अन्याय हुआ तो हम भी चुप नहीं बैठेंगेआपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के पहले राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र के निर्माण के लिए नगर निगम ने नंदग्राम में 51 हजार वर्ग मीटर जमीन चिह्नित की थी। इसमें से करीब 38 हजार वर्ग मीटर जमीन खाली है और लगभग 13 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा है। यहां करीब 80 मकानों की एक बस्ती बन चुकी है। नगर निगम पर एक तरफ जहां राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र के लिए जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध कराने का दबाव है, वहीं अब इन मकानों को ध्वस्त करना भी निगम के लिए चुनौती बना हुआ है। नगर निगम के सपंत्ति अधिकारी व अपर नगरायुक्त आरएन पांडेय का कहना है कि निगम की जमीन पर बने मकानों को चिह्नित करा लिया गया है। इनमें से 25 लोगों का ब्योरा मिल गया है। जल्द ही इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर कार्रवाई की जाएगी। सरकारी जमीन खाली कराकर राजनीतिक प्रशिक्षण केंद्र के लिए उपलब्ध कराई जाएगी।

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