परमात्मा से मित्रता हो कृष्ण सुदामा जैसी : संत सियाराम

संत भेलू , ढाढरवाला के सयुंक्त तत्वाधान में ब्रह्लीन सन्त श्री जियाराम जी महाराज की 118 वीं वर्षी पर भेलू झुपी में कथा के अंतिम दिन कथा वाचक श्री सियाराम जी महाराज ने कथा सुनाते हुए श्री कृष्ण रूखमणी विवाह, और कृष्ण के परम मित्र सुदामा की दोस्ती का प्रसंग बड़े ही मार्मिक रूप से श्रोताओं को सुनाया। उन्होंने कहा कि कृष्ण को जैसे ही अपने दोस्त सुदामा के आने का समाचार मिला, तो वे नंगे पांव दौड़ते हुए पहुंचे और अपने दोस्त की दरिद्रता देखकर बहुत दुखी हुए। उन्होंने राजमहल में लाकर उनके पैर धोए और बाद में सारे हालचाल पूछे। सुदामा के पत्नि के द्वारा भेजे गए सूखे चावल भी भगवान कृष्ण ने बहुत ही आनंद से खाये। कुछ दिन रुकने के बाद जब सुदामा वापस अपने गाँव पहुंचे , तो वे खुद को वहां का नजारा देखकर हैरान रह गए। अब भगवान की कृपा से उनकी सारी दरिद्रता दुर हो गई। कथा के दौरान जैसे ही *अरे द्वारपालो, कन्हैया से कह दो*….भजन गाया गया तो सभी भाव विभोर हो गए। कथा श्रीकृष्ण सुदामा की आकर्षक झांकिया सजाई गई।

साँगाराम सुथार ने बताया कि शाम को भव्य जागरण होगा और बाहर पधारें हुए बड़े बड़े सन्त महात्मा अपने भजनों की प्रस्तुति देंगे। साँगाराम सुथार ढाढरवाला ने बताया कि कथा के अंतिम दिन बाहर से पधारें संतो ने अपनी वाणी से सबका मन मोह लिया । मुरली मनोहर धोरे से रघुवीर जी, नोखा से माधुदास, खेड़ापा से गोपालदास, सिंथल से रामप्रसाद,भजनदास, आदूराम , चंद्रशेखर महाराज, विष्णु महाराज, मनोज गोयल आदि उपस्थित थे। शुक्रवार वो हवन एवं यज्ञ हवन होगा।

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