गौशाला या मौतशाला, कहाँ है सरकार, विशेष रिपोर्ट

लवी जैन, जिला संवाददाता, बागपत

दिल्ली से प्रकाशित राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक समाचारपत्र

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गोशाला या मौतशाला

सूबे में आय दिन हो रही गोवंशों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नही ले रहा है । एक तो गोवंशों के लिए गोशालाओं में देखभाल की कमी, ऊपर से तेज़ धूप और भीषण गर्मी । भूखे प्यासे तड़पते इन गोवंशों की मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है ?

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सरकार लगातार अपने अधिकारियों को निर्देश दे रही है लेकिन उन्ही के अधिकारी इस ओर ध्यान नही दे पा रहे है । जिस कारण रोजाना गोवंशों की दर्दनाक मौते हो रही है। इतना ही नही इन गोवंशों की अंत्येष्टि के लिए भी प्राप्त साधनों की अनदेखी कर उन्हें कूड़े के ढेर में दबा दिया जाता है जिससे अब ये गोशाला नही बल्कि मौतशाला बन गयी है।

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भूख और प्यास से तड़पते ये गोवंश भीषण गर्मी में खुले आसमान में गोवंश कूड़े के ढेर के नीचे दाबे गए गोवंश ये तस्वीरें उन दर्दनाक गोवंशों की है जिनकी भूख प्यास और गर्मी के कारण मौत हो चुकी है ये तस्वीरें सरकार की उन हकीकतों को दर्शाने और झूठे निर्देशो को बयां करने के लिए काफी है जिन्हें उत्तरप्रदेश सरकार के मुखिया योगी आदित्यनाथ अपने भाषणों में और बैठकों में अधिकारियों को कहते सुनते अक्सर देखे जाते है । सूबे की सरकार गोवंशों को लेकर कितनी चिंतित है उनके अधिकारी गोशालाओं में गोवंशों को लेकर कितना ध्यान दे रहे है उसे बयां करने के लिए ये तस्वीरें काफी है । बागपत के इस नगर पंचायत टिकरी कस्बे में बने कांजी हाउस की शायद ये कड़वी हकीकत है । सरकार ने सभी जगह गोशालाएं तो बनवा दी लेकिन उनकी कितनी देख रेख यहां की जा रही है वो शायद आपको बताने की आवश्यकता नही है । योगी सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाते इन लोगो मे शायद इसीलिए गुस्सा है क्योंकि सरकार जो दावे कर रही है वो खोखले साबित होते नज़र आ रहे है। आय दिन गोवंश तड़प तड़पकर मर रहे है, एक दो नही तीन.. चार.. पांच… ना जाने ऐसे कितने गोवंश है जिनकी यहां मौते हो चुकी है । कचरे कूड़े के ढेर से गोवंशों के अवशेष मिल रहे है । स्थानीय लोगो का आरोप है कि टिकरी कस्बे के चेयरमैन से लेकर अधिकारियों तक इस मामले की पहले भी शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई सुनवाई नही होती । गोशालाओं के नाम पर मौतशालाये बन गयी है । आईये आपको यहां के स्थानीय लोगो की भी बात सुनवाते है उनका क्या कहना है ।

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विडियों बाईट संग्लन है

आपने सुन लिया होगा जो यहां के स्थानीय लोगो की शिकायतें है जो महिलाएं गन्दगी के ढेर पर जीने को मजबूर हैं । अब आपको यहां के अधिकारियों की बात सुनवाते है उनका क्या कुछ कहना है —-

विडियों बाईट संग्लन है

ऐसा नही है कि अधिकारियों को इस बात की जानकारी न हो लेकिन जानकर सब अनजान बने है औऱ मामला मीडिया में आने के बाद वही जांच की रटी रटाई बात कह देते है । आखिर कब तक इन गोवंशों की मौते होती रहेगी कब तक अधिकारी युही जांच के नाम पर अपना पल्ला झाड़ते रहेंगे । योगी जी आप भी जरा देख लीजिए बागपत की गोशालाओं की इन कड़वी हकीकतों को ।

बागपत
लवी जैन,जिला संवाददाता बागपत

आर.के.जैन

एडिटर इन चीफ

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से प्रकाशित, राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र

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