बैंक में स्टाफ की कमी से खाता धारक परेशान

गणेश जैन ब्यूरो चीफ जैसलमेर/ कि लाइन टाइम्स न्यूज़

जैसलमेर जिले के फलसूंड कस्बे में एसबीआई बैंक में कर्मचारियों की कमी के चलते खाताधारियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों की कमी के कारण बैंक में न तो डायरी की एंट्री होती हे न ही बैंलेंस देख पाते हैं। इस कारण उपभोक्ताओं को परेशानी हा़े रही है। बैंक में एक कनिष्ठ लिपिक व एक मैनेजर तथा एक सेकेंड मैनेजर है। तीन स्टॉफ में 40 हजार से अधिक उपभोक्ताओं के खाते हैं।

पिछले दिनों सेकेंड मेनेजर महेंद्र कुमार सामटिया का स्थनांतरण हाे गया। अब यहां दो स्टाफ छुट्टी पर चल रहे हैं। हकीकत तो यह है कि इस बैंक में 40 हजार खाते धारकों में 80 प्रतिशत खाता एेसे लाेगाें के हैं जाे अपनी पर्ची भी नहीं भर पाते है। दिनभर इधर उधर भटकते रहते है पर इनकी मदद करने वाला बैंक में कोई नही मिलता है। स्थानीय व्यापारी गौतम चंद जैन,घनश्याम चांडक ने बताया कि फलसूंड बैंक में स्टाफ की कमी से लाेग परेशान हैं। साथ ही किसानों की केसीसी का काम नहीं हाे पा रहा है।

फलसूंड. कस्बे में एसबीआई बैंक में स्टाफ की कमी के कारण ग्राहकों को हो रही है परेशानी।

राष्ट्रीयकृत बैंक के अभाव में ग्रामीणों को हो रही है परेशानी

पोकरण | उपखंड क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों में राष्ट्रीयकृत बैंक नहीं होने के कारण ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैंक के अभाव में ग्रामीणों को रुपए लेने के लिए कई किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। उपखंड क्षेत्र के कई ग्राम पंचायतों में राष्ट्रीयकृ बैंक के अभाव में ग्रामीणों के छोटे मोटे कामकाज रुक जाते हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार मांग उठाने पर केन्द्र सरकार द्वारा इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रह है। इसके चलते हरियासर, लोंगासर, धोलासर, जोगराजगढ़, नई राजमथाई, सुभाषनगर, बांधेवा मेकूबा, जालोड़ा, दूधिया, खेलाणा, करणीनगर, गुन्दाला, जालोड़ा पोकरणा, बांधेवा, राजगढ़, बलाड़ सहित करीब आधा दर्जन ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर राष्ट्रीयकृत बैंक के अभाव में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों को नरेगा, मुख्यमंत्री आवास योजना, कृषक मित्र योजना, विद्यार्थियों के लिए छात्रवृति, बैंक चालान किसान क्रेडिट कार्ड योजना, डिमांड ड्रापट, इंदिरा आवास जैसे कार्यों के क्रियान्वन में राष्ट्रीयकृत बैंक की आवश्यता है। राष्ट्रीयकृत बैंक के अभाव में क्षेत्र के किसानों, सरकारी कर्मचारियों तथा व्यापारियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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