तेरापंथ प्रणेता आचार्य श्री महाश्रमण जी का संदेश “जैन हो या अजैन,सभी बन सकते हैं गुडमैन”

सुरेंद्र मुनोत, स्टेट चीफ रिपोर्टर, पश्चिम बंगाल

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जैन हो या अजैन बन सकते हैं गुडमैन:

आचार्यश्री महाश्रमण

तेरापंथ प्रणेता के ज्योतिचरण से पावन हुआ यशवंतपुर नगर

भव्य स्वागत जुलूस के साथ यशवंतपुरवासियों ने आचार्यश्री का किया भावभरा अभिनन्दन

वाई मुनिस्वमप्पा कल्याण मण्डप में उपस्थित श्रद्धालु अमृतवाणी का श्रवण कर हुए निहाल

अपने आराध्य की अभिवन्दना में भावसुमनों यशवंतपुरवासियों ने किया समर्पित

27.06.2019 यशवंतपुर, बेंगलुरु (कर्नाटक): जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी अहिंसा यात्रा के साथ बेंगलुरु महानगर की उपनगरीय यात्रा कर रहे हैं। आचार्यश्री की इस उपनगरीय यात्रा ने मानों पूरे बेंगलुरु की फिजा को अध्यात्ममय बना दिया है। चारों ओर अहिंसा यात्रा व यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री के मंगल संदेश ही सुनाई दे रहे हैं। लोग आचार्यश्री की अमृतवाणी जन-जन के मानस का अभिसिंचन कर रही है।
उपनगरीय यात्रा के दौरान गुरुवार को आचार्यश्री अपनी अहिंसा यात्रा के साथ शेषाद्रिपुरम से मंगल प्रस्थान किया। शेषाद्रिपुरमवासियों ने अपने आराध्य को अपनी नगर से विदा कर रहे थे तो आज यशवंतपुरवासी अपने आराध्य के अभिनन्दन में पलक पांवड़े बिछाए हुए पूज्यचरणों के स्पर्श की प्रतीक्षा कर रहे थे। रास्ते में अनेकानेक जैन-अजैन श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री के दर्शन किए तो आचार्यश्री ने उन्हें पावन आशीर्वाद प्रदान किया। लगभग छह किलोमीटर का विहार कर आचार्यश्री जैसे ही यशवंतपुर नगर की सीमा मंे पधारे, वहां लम्बे समय से अपने आराध्य के प्रतीक्षा में खड़े सैकड़ों श्रद्धालु जयघोष कर उठे। उनके जयकारे उनकी हर्षाभिव्यक्ति के साधन बने हुए थे। भव्य जुलूस के साथ आचार्यश्री वाई मुनिस्वमप्पा कल्याण मण्डप में पधारे। आचार्यश्री के प्रवचन पंडाल में उपस्थित होने से पूर्व यशवंतपुर सभा के पूर्व अध्यक्ष श्री कन्हैयालाल गन्ना, मूर्तिपूजक समाज के श्री दिनेश सेठिया, स्थानकवासी संघ के अध्यक्ष री सुमेर मुणोत ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। वहीं यशवंतपुर युवक परिषद के युवाओं ने स्वागत गीत का संगान किया।
तत्पश्चात् आचार्यश्री प्रवचन पंडाल में पधारे। समुपस्थित श्रद्धालुओं को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि आदमी के मन में कामनाओं की तरंगे उठती रहती हैं। ये तरंगे कभी अच्छी भी होती हैं तो कभी बुरी भी हो सकती हैं। अच्छी व शुभकामना अपनी आत्मा के लिए अच्छी और कल्याणकारी होती है। अशुभ कामना या गलत कामना आत्मा के लिए अच्छी नहीं होती। जो आत्मा दूसरों के लिए अशुभ कामना करती हो, दूसरों का अनिष्ट चाहने वाली हो, इन्द्रिय विषयों के भोग की कामना रखती है, वह कामना शल्य के समान और आत्मा के अहितकर होती है। आदमी को अपनी कामनाओं को शुभ बनाने का प्रयास करना चाहिए। बुरे कामनाओं के कारण मन कूड़ाघर के समान हो जाता है। आचार्यश्री ने लोगों को पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि यदि किसी आदमी के जीवन में अहिंसा यात्रा के तीनों सूत्र सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति किसी आदमी के जीवन में आ जाए तो जैन हो या अजैन वह गुडमैन बन सकता है। आचार्यश्री ने यशवंतपुरवासियों को सम्यक्त्व दीक्षा भी प्रदान की।
तत्पश्चात् बेंगलुरु चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री मूलचंद नाहर, यशवंतपुर सभाध्यक्ष श्री प्रकाशचंद बावेल, उपाध्यक्ष श्री मदन बरड़िया, मंत्री श्री गौतमचंद मुथा, मुमुक्षु धीरज और मुमुक्षु आंचल बरड़िया ने अपनी अपने भावसुमन श्रीचरणों में समर्पित किए। काउन्सलर श्री जयपाल रेड्डी ने आचार्यश्री के दर्शन कर आचार्यश्री के स्वागत में अपनी भावाभिव्यक्ति दी। ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। तेरापंथ महिला मंडल ने स्वागत गीत का संगान किया। कल्याण मण्डप के आॅनर श्री वाई.एम. रामू ने आचार्यश्री के दर्शन कर आशीष प्राप्त की।

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