जानें किन्नर समुदाय के बारे मे

हसीना किन्नर

महिला प्रदेश अध्यक्षा, मध्यप्रदेश

उपभोक्ता एंव मानव अधिकार रक्षा समिति

जय बहुचर माता दी किन्नर कथा

कहा जाता है इस संसार का निर्माण स्त्री पुरुष मिलकर करते हैं। मगर इसके अलावा इस संसार में ऐसा एक और समुदाय है जिसे आज के समय में समाज में पूरा मान-सम्मान मिलना शुरू हो गया है, ये है किन्नर समुदाय। अगर हिंदू धर्म की कुछ मान्यताओं की मानें तो किन्नर की उत्पत्ति भगवान शंकर ने की थी।
आप में से बहुत से लोगों के घर शुभ अवसरों पर इन्हें बधाई और आशीर्वाद देते हुए पाया जाता है।
कहा जाता है किन्नरों की दुआओं और आशीर्वाद

में बहुत ताकत होती है। इसके चलते ही हर कोई इनका आशीर्वाद पाने की इच्छुक होता है। फिर चाहे उन्हें इनके बदले में इन्हें कितना भी नेग क्यों न देना पड़े।
बता दें किन्नर हर शुभ अवसर जैसे घर में बच्चे के जन्म पर, या शादी आदि पर बधाई आदि देकर नेग मांगते हैं। लेकिन ये नेग मांगते क्यों है इसके पीछे का कारण किसी को नहीं पता होगा।
तो चलिए आपको बताते हैं इसके पीछे का एक पौराणिक कारण
दरअसल इसके पीछे की कहानी रामायण काल की है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान राम 14 वर्ष के वनवास के बाद जब अयोध्या लौट रहे थे तब उन्हें अयोध्या नगर के बाहर कुछ नई बस्तियां देखीं। जब उन्होंने उन लोगों के बारे में पता किया, तब उन्हें पता चला कि यहां किन्नर समुदाय के लोग रहते हैं। इसके बाद श्री राम ने उन सबसे पूछा कि आप लोग यहां ऐसे क्यों रह रहे हैं?
इस पर किन्नरों ने उत्तर दिया कि जब आप वनवास के लिए जा रहे थे तब आपके पीछे-पीछे अयोध्यावासी भी चल रहे थे। उस समय आप अपने पीछे अयोध्यावासियों को आते देखा तो आपने सभी स्त्री और पुरुष को लौट जाने का निर्देश दिया और कहा कि मैं नियत समय पर वापस अयोध्या लौट आऊंगा।
किन्नरों का कहना था कि आपने उनके लिए कोई निर्देश नहीं दिया था। यही कारण है कि आज तक हमलोग यहां बस्ती बनाकर इंतज़ार कर रहे हैं। किन्नरों की ये बात जानने के बाद श्री राम को बहुत अफ़सोस हुआ। जिसके बाद वे सभी किन्नरों को अयोध्या नगर में ले गए। किन्नरों का प्रेम और आस्था को देखते हुए भगवान राम ने उन्हें आशीर्वाद दिया कि आपका आशीर्वाद आने वाली नई पीढ़ी को फलीभूत करेगा।
कहा जाता है यही कारण है कि शुभ अवसर किन्नर समुदाय को लोग बधाइयां और आशीर्वाद देकर नेग मांगते है। भगवान श्री राम के आशीर्वाद के कारण ही ये मान्यता प्रचलित हुई कि उनका दिया गया आशीर्वाद कभी खाली नहीं जाता। इसलिए कोई भी शुभ अवसर पर घर पहुंचे किन्नर समुदाय के लोगों को नाराज़ नहीं करता।

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